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सोमवार को छात्राओं ने सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन किया था।
– फोटो : अमर उजाला
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बिहार में पहले कॉलेजों में ही इंटरमीडिएट की पढ़ाई होती थी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आदेश पर अब एक अप्रैल से इंटर की पढ़ाई सिर्फ हाईस्कूल में होगी। कॉलेज में नहीं। होना यह चाहिए था कि जिस सत्र में बच्चे पढ़ रहे हैं, उसके बाद एडमिशन नहीं लिया जाता। लेकिन, मनमाने फैसलों के लिए चर्चित केके पाठक ने आदेश दिया कि जो कॉलेज में भी पढ़ रहे, उन्हें स्कूलों में ट्रांसफर कर दिया जाए। छात्रों का विरोध इसी बात पर है कि वह कॉलेज में फी दे चुके, अब स्कूल में ट्रांसफर के लिए कहां से पैसा लाएंगे।
बड़ा संकट यह भी है कि बिहार बोर्ड ने OFSS विंडो के जरिए आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू करा दी है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि जिस स्कूल में सीट होगी- वहां ही एडमिशन लिया जाएगा। संकट यही है कि शहरी क्षेत्रों के अच्छे सरकारी स्कूलों या निकटवर्ती स्कूलों में सीटें भरी होंगी तो इनका आवेदन दूर वाले स्कूलों या चौपट स्कूल में कराना होगा। इसी के गुस्से में अलग-अलग कॉलेजों के सामने सड़क जाम करने के बाद बुधवार को पटना में बोर्ड ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया गया। कोई असर नहीं पड़ा तो आज सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड और भारतीय जनता पार्टी के दफ्तरों के बाहर हंगामा करने लगे।
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