BHU: टाइटेनियम और कार्बन से बने उपकरण से आसान हो जाएगा दांत का प्रत्यारोपण, प्रोफेसर के शोध में मिला पेटेंट

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Dental implants will become easier with devices made of titanium and carbon

बीएचयू ट्रामा सेंटर में बन रही सीसीयू
– फोटो : अमर उजाला

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बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय में हुए शोध में टाइटेनियम-कार्बन मिश्रित उपकरण से दंत प्रत्यारोपण को उपयोगी बताया गया है। संकाय के प्रो. राजेश बंसल के शोध को पेटेंट भी मिल गया है। उनका कहना है कि टाइटेनियम एक विशेष धातु है, जो वजन में हल्का और मजबूत होता है। बैंड भी आसानी हो जाता है।

उन्होंने बताया कि कार्बन मानव शरीर का प्रमुख घटक तत्व है। इससे बना इंप्लांट सबसे अधिक कारगर होगा। ब्रिज की पुरानी प्रक्रिया के संबंध में दांतों के निकले गए कुछ या पूर्ण सेटों के प्रतिस्थापन में स्वस्थ प्राकृतिक दांतों या हटाने योग्य प्लेटों को घिसने की आवश्यकता होती है। ब्रिजिंग प्रक्रिया में दांत घिसने, ओवरलोडिंग और पायरिया के कारण निकल जाते थे। 

मुख्यधारा के दंत प्रत्यारोपण टाइटेनियम से बने होते हैं। क्योंकि टाइटेनियम में ऑक्सीजन के लिए एक उच्च संबंध होता है और आसानी से इसकी सतह पर एक ऑक्साइड परत बनाता है। आमतौर पर, दंत प्रत्यारोपण को जबड़े की हड्डी के साथ दृढ़ता से एकजुट होने में तीन महीने से अधिक समय लगता है। 

कार्बन मानव शरीर का प्रमुख घटक तत्व है और कार्बन ने कोशिकाओं को उच्च जैव-अनुकूलता दिखाई है। शुद्ध कार्बन से बने प्रत्यारोपण के अन्य बायोमैटिरियल्स पर कई फायदे हैं। इस प्रत्यारोपण सामग्री में हड्डी के लिए तेजी से एकीकरण और लंबे समय तक स्थिरता की क्षमता है। शोध में डॉ. वकील सिंह, डॉ. आंचल श्रीवास्तव और डॉ. अमित शर्मा भी शामिल रहे।

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