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Mukhtar Ansari death
– फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht
विस्तार
कागजों में कोई सरकारी आदेश तो नहीं आता था…लेकिन बता यही दिया जाता था कि अगले कुछ दिनों तक ‘फाटक’ में बत्ती नहीं कटनी है। उन दिनों बिजली का बहुत संकट हुआ करता था। लेकिन आदेश होता था, तो उसका पालन भी होना ही था। मुख्तार अंसारी के मोहम्मदाबाद इलाके के बिजली घर में कभी काम करने वाले जूनियर इंजीयर रहे और अब रिटायर हो चुके रामलोटन सिंह कहते हैं कि फिर जब तक मुख्तार अंसारी यहां रहते थे, तब तक बिजली भी पलक नहीं झपकाती थी। मुख्तार अंसारी के दबदबे की ऐसी कई कहानियां गाजीपुर, मऊ, बलिया और आसपास के इलाकों में अब सुनाई जा रही हैं। यहां के लोगों का कहना है कि पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी की 786 नंबर वाली गाड़ियों का काफिला दहशत के लिए ही काफी था।
मुख्तार अंसारी की मौत के बाद कभी उसके इलाके में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों से लेकर उत्तर प्रदेश में जरायम की दुनिया को रिपोर्ट करने वाले पत्रकार कहते हैं कि यूसुफपुर मोहम्मदाबाद के ‘फाटक’ से मुख्तार की सरकार चलती थी। उत्तर प्रदेश के अपराध को करीब से रिपोर्ट करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनीष मिश्रा कहते हैं कि मुख्तार अंसारी के घर को ‘फाटक’ कहा जाता है। उनका कहना है कि एक दौर था कि पूर्वांचल के इलाके में जिसने फाटक पर दस्तक दे दी, तो उसको कोर्ट कचहरी और पुलिस थाने के चक्कर ही नहीं लगाने पड़ते थे। मनीष कहते हैं कि मुख्तार अंसारी ने जब जरायम की दुनिया में कदम रखा तो उसका दबदबा न सिर्फ पूर्वांचल, बल्कि पड़ोसी मुल्क नेपाल तक में बड़े क्रिमिनल नेटवर्क के साथ जुड़ने लगा। वह कहते हैं कि मुख्तार अंसारी का एक जमाने में अपने इलाके में बसों का बड़ा नेटवर्क हुआ करता था। इसी बसों के नेटवर्क की अदावत में जब सच्चिदानंद राय की हत्या हुई, मुख्तार अंसारी का कद बढ़ना शुरू हो गया।
कभी गाजीपुर में बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर रहे राम लोटन सिंह कहते हैं कि जब कुछ बड़े शहरों को छोड़कर जिलों में 8 से 10 घंटे ही बिजली आया करती थी, तो मुख्तार अंसारी के मोहम्मदाबाद आने पर गांव को बिजली से रोशन कर दिया जाता था। लखनऊ से आदेश आते थे कि ‘फाटक’ में बिजली नहीं जानी चाहिए। और नतीजा यही होता था कि जब तक मुख्तार अंसारी अपने इलाके में रहते हैं, तब तक बिजली नहीं जाती है। मुख्तार अंसारी के ऐसे कई किस्से हैं, जो अब उनकी मौत के बाद इलाकों में सुनाए जा रहे हैं। बलिया के पत्रकार हरिओम राय बताते हैं कि यह बात शायद ही लोगों को मालूम हो कि मुख्तार अंसारी के गैंग की ओर से जब हत्याओं की चर्चा होती थी, तो कहा जाता था कि उसके गैंग में शामिल लोग गोलियां बर्बाद नहीं करते हैं। यह कहने का आशय यही होता था कि मुख्तार अंसारी के गैंग के लोग इतने शातिर निशानेबाज होते हैं कि एक ही गोली से काम खत्म करते थे।
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