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ईवीएम मशीन
– फोटो : अमर उजाला
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रामपुर की सियासी पिच पर 47 साल बाद एक बार फिर छह खिलाड़ी चुनावी मैदान में उतरे हैं। इससे पहले 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में भी इतने ही प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। उस साल भारतीय लोकदल के राजेंद्र शर्मा को जीत मिली थी। अब देखना यह होगा कि 47 साल बाद जीत की चाबी किसके हाथ लगती है।
रामपुर नवाबों का शहर रहा है। नवाबों ने यहां करीब सवा 200 साल तक अपना शासन किया। इसके बाद देश आजाद हुआ तो रामपुर रियासत का विलय स्वतंत्र भारत में हुआ। स्वतंत्र भारत में रामपुर रियासत के विलय होने के बाद पहली बार 1952 में रामपुर की आवाम ने लोकसभा चुनाव के लिए वोट डाले।
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