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इंदिरा गांधी
– फोटो : सोशल मीडिया
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आजाद भारत के पांचवें आम चुनाव ने देश में चुनावी प्रक्रिया की रूप-रेखा बदल दी थी। उस दौरान लोकसभा चुनाव 1971 में इंदिरा गांधी की राजनीतिक शक्ति को देश ने देखा था। तब कांग्रेस में दो फाड़ हो चुकी थी। उस चुनाव में पूर्व पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू के सारे पुराने दोस्त उनकी बेटी इंदिरा के खिलाफ थे। चुनावी मैदान में एक तरफ इंदिरा की नई कांग्रेस और दूसरी तरफ पुराने बुजुर्ग कांग्रेसी नेताओं की कांग्रेस (ओ) थी। इसी चुनाव में इलाहाबाद संसदीय सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा ने चुनाव लड़ा और उन्होंने एक तरफा जीत हासिल की।
1969 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखा गया गया था। तब उन पर पार्टी ने अनुशासन के उल्लंघन का आरोप लगाया था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने नई पार्टी कांग्रेस (आर) बनाई। वहीं, दूसरी ओर अन्य कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस (ओ) का नेतृत्व किया। तब कांग्रेस (ओ) ने इंदिरा हटाओ का नारा दिया, जबकि कांग्रेस आई ने ‘ गरीबी हटाओ’ का नारा दिया।
इस नारे ने उस चुनाव में कमाल मचा दिया। वरिष्ठ नेता नरेंद्र देव पांडेय बताते हैं कि इंदिरा गांधी गरीबी हटाओ नारे की बदौलत फिर से सत्ता में आ गईं। उस चुनाव में भारतीय जनसंघ ने भी देशभर में 22 सीटें जीतीं। हालांकि, कांग्रेस को इस चुनाव में ज्यादा फायदा हुआ। इलाहाबाद संसदीय सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा को जहां 142886 मत मिले तो वहीं कांग्रेस (ओ) के प्रत्याशी मंगला प्रसाद को इस सीट से 46998 मत ही मिले।
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