Varanasi: वायु प्रदूषण नियंत्रण में बनारस अव्वल, 366 में 306 दिन ग्रीन जोन, नगर निगम का भी मिला सहयोग

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Banaras tops in air pollution control green zone for 306 days out of 366

बनारस की हवा ऑरेंज और दो दिन रेड जोन में रहीं।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


बनारस की हवा में पिछले एक साल से काफी सुधार है। वर्ष भर के आंकड़ों पर गौर करें तो बनारस की हवा पिछले साल से लगातार ग्रीन जोन में है। 366 दिनों में 306 दिन बनारस की हवा सबसे बेहतर रही है। वहीं, एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 100 और 50 के नीचे ही रिकॉर्ड किया जा रहा है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के एप समीर के अनुसार चार साल पहले बनारस देश ही नहीं दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार था। बनारस में एयर क्वालिटी का इंडेक्स 350 के ऊपर हुआ करता था। पिछले दो साल में बनारस की हवा में तेजी से बदलाव हुआ है।

2022 से शुरू हुई सुधार की कवायद का ही नतीजा है कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के आंकड़ों के अनुसार बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स अधिकतम सौ और 50 के नीचे ही रिकॉर्ड किया गया। इसमें 306 दिन बनारस की हवा का वायु गुणवत्ता सूचकांक ग्रीन जोन में, 55 दिन येलो जोन में रहा। इसके अलावा तीन दिन बनारस की हवा ऑरेंज और दो दिन रेड जोन में रहीं।

एयर क्वालिटी इंडेक्स

अप्रैल 2023 26 दिन ग्रीन जोन 4 दिन येलो जोन  
मई 2023 24 दिन ग्रीन जोन 6 दिन येलो जोन 1 दिन ऑरेंज जोन
जून 2023 26 दिन ग्रीन जोन 4 दिन येलो जोन  
जुलाई 2023 30 दिन ग्रीन जोन 1 दिन येलो जोन  
अगस्त 2023 26 दिन ग्रीन 3 दिन येलो जोन 2 दिन रेड जोन
सितंबर 2023 28 दिन ग्रीन जोन 2 दिन येलो जोन  
अक्तूबर 2023 30 दिन ग्रीन जोन 1 दिन येलो जोन  
नवंबर 2023  19 दिन ग्रीन जोन 10 दिन येलो 1 दिन आरेंज जोन
दिसंबर 2023  22 दिन ग्रीन जोन 8 दिन येलो जोन 1 दिन ऑरेंज
जनवरी 2024  25 दिन ग्रीन जोन 6 दिन येलो जोन  
फरवरी 2024 24 दिन ग्रीन जोन 5 दिन येलो जोन  
मार्च 2024  26 दिन ग्रीन जोन 5 दिन येलो जोन  

नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त पहल का है असर

नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त पहल का असर है कि बनारस की हवा में तेजी से सुधार हुआ है। हवा में धूल कणों की संख्या लगातार कम हुई है और हवा में पीएम 10 की मात्रा में 10-15 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि शहर की हवा में तेजी से सुधार हुआ है। इसके तहत मिस्ट गन व स्प्रिंक्लर से नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।

ऐसे हुआ बदलाव

  • शहर में इलेक्ट्रानिक और सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ने से धूल, धुएं की मात्रा कम हुई है
  • नई बनी सड़कें व फ्लाईओवर के चालू होने से हवा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है
  • सड़कों का निर्माण, पटरी व नाली के बीच के गैप को इंटरलाकिंग से भरा गया
  • शहर में निर्माण के दौरान धूल कणों की मात्रा कम करने का ख्याल रखा गया
  • निर्माण स्थल पर हरा पर्दा लगाकर कार्य करने के निर्देश का हो रहा है पालन

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