हिमाचल: 1974 से पहले शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे हजारों लोगों को मिलेगा मालिकाना हक

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शिमला शहर

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1974 से पहले शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को 37 वर्ग मीटर जमीन का मालिकाना हक मिलेगा। शहरी विकास विभाग ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। अब उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी। पात्र लोग मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकेंगे। अगर लोगों ने ज्यादा जमीन कब्जाई है, तो उसे सरकार वापस लेगी। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वालों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, जिनकी सालाना आय तीन लाख रुपये से कम होगी, उन्हें यह अधिकार मिलेगा। कमेटी स्लम एरिया तय करेगी। नियमों के मुताबिक बिजली, पानी और सैनिटाइजेशन आदि की व्यवस्था देखी जाएगी। सरकार के इस फैसले का हजारों लोगों को फायदा होगा।

शहरी विकास विभाग ने स्लम डेवेलर्ज विधेयक में यह भी प्रावधान किया है कि इन लोगों के लिए कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए शहरी निकायों में नगरपालिका विकास निधि का प्रावधान किया जाएगा। इसमें प्रदेश सरकार की ओर से विकास कार्यों के लिए फंड जारी होगा। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों से एकत्र राशि भी इसी फंड में डाली जाएगी। इस बिल का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को संपत्ति का अधिकार देना है। विधानसभा में पहले ही इस विधेयक को मंजूरी दे दी गई थी। इसके बाद इसे राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा गया था। इसके बाद इसके नियम तय किए गए थे। शहरी विकास विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि नियम अधिसूचित किए गए हैं। उपायुक्तों की अध्यक्षता में गठित कमेटी होने के बाद ऐसे लोग आवेदन कर सकेंगे। करीब 37 वर्ग मीटर जमीन पर मालिकाना हक दिया जाना है।  

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1974 से पहले शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को 37 वर्ग मीटर जमीन का मालिकाना हक मिलेगा। शहरी विकास विभाग ने नियम अधिसूचित कर दिए हैं। अब उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी। पात्र लोग मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकेंगे। अगर लोगों ने ज्यादा जमीन कब्जाई है, तो उसे सरकार वापस लेगी। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रहने वालों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, जिनकी सालाना आय तीन लाख रुपये से कम होगी, उन्हें यह अधिकार मिलेगा। कमेटी स्लम एरिया तय करेगी। नियमों के मुताबिक बिजली, पानी और सैनिटाइजेशन आदि की व्यवस्था देखी जाएगी। सरकार के इस फैसले का हजारों लोगों को फायदा होगा।

शहरी विकास विभाग ने स्लम डेवेलर्ज विधेयक में यह भी प्रावधान किया है कि इन लोगों के लिए कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए शहरी निकायों में नगरपालिका विकास निधि का प्रावधान किया जाएगा। इसमें प्रदेश सरकार की ओर से विकास कार्यों के लिए फंड जारी होगा। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों से एकत्र राशि भी इसी फंड में डाली जाएगी। इस बिल का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को संपत्ति का अधिकार देना है। विधानसभा में पहले ही इस विधेयक को मंजूरी दे दी गई थी। इसके बाद इसे राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा गया था। इसके बाद इसके नियम तय किए गए थे। शहरी विकास विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने कहा कि नियम अधिसूचित किए गए हैं। उपायुक्तों की अध्यक्षता में गठित कमेटी होने के बाद ऐसे लोग आवेदन कर सकेंगे। करीब 37 वर्ग मीटर जमीन पर मालिकाना हक दिया जाना है।  



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