[ad_1]

एएमयू में व्हाइट कोट सेरेमनी में कुलपति तारिक मंसूर
– फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज में बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) और बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस) के नए छात्रों की व्हाइट कोट सेरेमनी आयोजित हुई, जिसमें उन्होंने सफेद कोट पहनकर चिकित्सा पेशे की नैतिकता को बनाए रखने का संकल्प लिया और एक नए करियर की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने हिप्पोक्रकेट शपथ भी ली।
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि आप सभी इस नई यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं और उम्मीद है कि आप ज्ञान और कौशल से जुड़ेंगे और रिश्तों के मायने समझेंगे। छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह चिकित्सा और दंत विज्ञान के प्रतिष्ठित व्यवसायों में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें सेवा और व्यक्तिगत बलिदान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जेएनएमसी और डॉ. जियाउद्दीन अहमद डेंटल कॉलेज भारत के सर्वश्रेष्ठ कॉलेज में से एक हैं और यहां एक अनूठा वातावरण है, जो छात्रों को चिकित्सा और दंत चिकित्सा के क्षेत्र में कई विकासों के बारे में बताता है।
फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के डीन प्रो. एमयू रब्बानी ने कहा कि छात्र सफेद कोट पहनकर कुछ नैतिक मानकों को बनाए रखने की प्रतिज्ञा करते हैं। यह उनके माता-पिता के लिए भी एक यादगार पल है, जिन्हें वह डॉक्टर और दंत चिकित्सक बनते देखना चाहते हैं। स्वास्थ्य देखभाल पेशा जीवन बचाने का एक अवसर है और डॉक्टरों को अपनी क्षमता के अनुसार रोगियों का इलाज करना चाहिए। रोगी की गोपनीयता का सम्मान करना चाहिए।
जेएनएमसी के प्राचार्य प्रोफेसर राकेश भार्गव ने कहा कि अगले साढ़े चार वर्षों में मेडिकल और डेंटल छात्रों को आधुनिक शिक्षण और अनुसंधान और उपचार के सिद्धांतों से अवगत कराया जाएगा। जेडएडीसी के प्राचार्य प्रो. राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि सफेद कोट समारोह सिर्फ एक रस्म नहीं है बल्कि एक छात्र के आगामी करियर और पेशे की जिम्मेदारियों को समझने का अवसर है। सभी नए छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे जिस पेशे में प्रवेश कर रहे हैं, उसमें रोगियों के हितों को प्राथमिकता देना और ईमानदारी के मानकों को स्थापित करना सर्वाेपरि है।
स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की प्रोफेसर तमकीन खान ने छात्राओं को हिप्पोक्रेटिक शपथ दिलाई। डॉ. शगुफ्ता मोईन (जैव रसायन विभाग, जेएनएमसी) ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। डॉ. नफीस फैजी (सामुदायिक चिकित्सा विभाग) ने कार्यक्रम का संचालन किया।
[ad_2]
Source link