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अतीक अहमद। फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला
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पांच बार के विधायक और यूपी की हॉट सीट फूलपुर से सपा के टिकट पर सांसद रहे माफिया अतीक का सियासी रथ उसकी मौत के साथ ही अनिश्चितता के भंवर में डूब रहा है। तीन दशक के अपने सियासी सफर में आखिरी बार उसने वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साबरमती जेल से चुनाव लड़ा था।
एक दौर था जब कई दलों ने उसकी जुर्म की काली किताब के पन्नों पर सियासत का कवर खूब चढ़ाया, लेकिन अब उसके राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाने वाला भी कुनबे में कोई नजर नहीं आ रहा है। 50 हजार की इनामी बीवी शाइस्ता परवीन फरार है तो दो बेटे उमर और अली जेल की सलाखों के पीछे हैं। बालगृह से छूटने के बाद बाकी दो बेटे अहजम और आबान रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
चकिया में 1962 में एक तांगे वाले के परिवार में सबसे बड़े बेटे के रूप में पैदा हुए अतीक के जुर्म की दुनिया में से लेकर सियासी गलीचे पर कदम रखने तक की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। 10वीं में फेल होने के बाद ही अतीक ने पढ़ाई छोड़ अवैध वाहन स्टैंडों से वसूली और गुंडागर्दी शुरू कर दी। पैसे और पावर का चस्का ऐसा लगा कि 1989 में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा और शहर के माफिया चांद बाबा को हराकर विधायक बन गया।
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