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Pitru Paksha 2022 श्राद्धकर्ता के लिए गया श्राद्ध का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ अनिवार्य नियम हैं. वे पितरों को तृप्त करने के लिए तर्पण प्रातः काल करें. इस बेला में तर्पण का जल अमृत रूप में पितरों को प्राप्त होता है. पितृ श्राद्ध की उत्तम बेला मध्याह्न अथवा अपराह्न है. श्राद्ध के अंतराल में उन्हें भूमि पर शयन करना, गया तीर्थ क्षेत्र में रात्रि निवास, एक बार अन्न ग्रहण करना, सत्य का आचरण करना, धोती पहनने के साथ कंधे पर दूसरा वस्त्र धारण करना, गया तीर्थ क्षेत्र में नंगे पैर से चलना, तैल मर्दन का त्याग करना और ब्रह्मचर्य पूर्वक रहना यह नियम अनिवार्य है. श्राद्ध में कुछ निषिद्ध है- पिंड पर केला अर्पण करना, खुले आसमान में पिंडदान करना, पिंड को स्थिर जल में डालना, क्रोध करना, अपवित्र भोजन करना, दान लेना व गया तीर्थ में मुंडन कराना. गया तीर्थ में प्रवेश के पहले ही मुंडन करा लेने का विधान है.
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