कफ सीरप केस: रामनगर में 12 बच्चों की मौत मामले में जांच पूरी, दवा कंपनी मालिक-सप्लायर समेत पांच को बनाया आरोपी

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(सांकेतिक तस्वीर)

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– फोटो : सोशल मीडिया

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उधमपुर जिले की रामनगर तहसील में दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच विभिन्न गांवों में 12 बच्चों की खांसी की दवाई पीने से मौत के मामले में पुलिस ने करीब तीन वर्ष तक जांच करने के बाद मंगलवार को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के समक्ष चार्जशीट दायर कर दी है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में पांच लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें तीन दवा बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं और एक जम्मू का रहने वाला दवाई सप्लाई करने वाला है। एक रामनगर में दवा बेचने वाला विक्रेता है। गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में अचानक से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे।

एक एक कर कई बच्चों की मौत होने पर केंद्र सरकार तक हलचल मच गई थी और इसकी जांच के लिए केंद्र से भी एक टीम को रामनगर भेजा गया था। केंद्र की टीम ने जांच के दौरान पाया था कि इन सभी बच्चों ने कोल्ड बेस्ट पीसी कफ सीरप खांसी की दवा पी थी और इसी के कारण इनकी मौत हो गई।

यह दवाई हिमाचल प्रदेश में स्थित कंपनी ने बनाई थी। इस मामले की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जम्मू, पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पहुंची थी। दवाई के इस सिरप की जांच में जहरीला पदार्थ डाइथेलेन ग्लाइकोल मिला था। इसके बाद इस दवाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

हालांकि पुलिस को इसकी जांच पूरी करने में करीब तीन वर्ष का समय लग गया। एसडीपीओ रामनगर भीष्म दुबे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का नेतृत्व कर इसकी जांच कर रहे थे। मंगलवार को पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद करीब 800 पेज की शार्जशीट दायर कर दी है।

इस चार्जशीट में दवा कंपनी के मालिक परशोतम लाल गोयल और इनके दो बेटे मानिक गोयल और कोनिक गोयल तीनों निवासी 28/ए गोविंद नगर अंबाला कैंट हरियाणा को आरोपी बनाया गया है। इनके साथ ही जम्मू में मेडिकल डिपो चलाने वाले वरिंद्र कुमार जंडियाल और इनके साथ रामनगर में जम्वाल मेडिकल हॉल चलाने वाले मोहिंद्र सिंह जम्वाल को आरोपी बनाया गया है। 

दवा कंपनी के मालिकों के खिलाफ पुलिस ने अंडर सेशन 304,274,275,325 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी की है, जबकि वरिंद्र कुमार जंडियाल और मोहिंद्र जम्वाल के खिलाफ सेशन 304, 275, 325 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच की है।

बच्चों की मौत के बाद पुलिस ने तीन मार्च 2020 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और अप्रैल 2020 में मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया था। 20 दिसंबर 2022 मंगलवार को जांच पूरी कर शार्जशीट दायर की है। इस मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी 2023 को सेशन जज के सामने होगी।

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उधमपुर जिले की रामनगर तहसील में दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच विभिन्न गांवों में 12 बच्चों की खांसी की दवाई पीने से मौत के मामले में पुलिस ने करीब तीन वर्ष तक जांच करने के बाद मंगलवार को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के समक्ष चार्जशीट दायर कर दी है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में पांच लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें तीन दवा बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं और एक जम्मू का रहने वाला दवाई सप्लाई करने वाला है। एक रामनगर में दवा बेचने वाला विक्रेता है। गौरतलब है कि दिसंबर 2019 में अचानक से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे।

एक एक कर कई बच्चों की मौत होने पर केंद्र सरकार तक हलचल मच गई थी और इसकी जांच के लिए केंद्र से भी एक टीम को रामनगर भेजा गया था। केंद्र की टीम ने जांच के दौरान पाया था कि इन सभी बच्चों ने कोल्ड बेस्ट पीसी कफ सीरप खांसी की दवा पी थी और इसी के कारण इनकी मौत हो गई।

यह दवाई हिमाचल प्रदेश में स्थित कंपनी ने बनाई थी। इस मामले की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जम्मू, पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पहुंची थी। दवाई के इस सिरप की जांच में जहरीला पदार्थ डाइथेलेन ग्लाइकोल मिला था। इसके बाद इस दवाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

हालांकि पुलिस को इसकी जांच पूरी करने में करीब तीन वर्ष का समय लग गया। एसडीपीओ रामनगर भीष्म दुबे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का नेतृत्व कर इसकी जांच कर रहे थे। मंगलवार को पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद करीब 800 पेज की शार्जशीट दायर कर दी है।

इस चार्जशीट में दवा कंपनी के मालिक परशोतम लाल गोयल और इनके दो बेटे मानिक गोयल और कोनिक गोयल तीनों निवासी 28/ए गोविंद नगर अंबाला कैंट हरियाणा को आरोपी बनाया गया है। इनके साथ ही जम्मू में मेडिकल डिपो चलाने वाले वरिंद्र कुमार जंडियाल और इनके साथ रामनगर में जम्वाल मेडिकल हॉल चलाने वाले मोहिंद्र सिंह जम्वाल को आरोपी बनाया गया है। 

दवा कंपनी के मालिकों के खिलाफ पुलिस ने अंडर सेशन 304,274,275,325 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी की है, जबकि वरिंद्र कुमार जंडियाल और मोहिंद्र जम्वाल के खिलाफ सेशन 304, 275, 325 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर जांच की है।

बच्चों की मौत के बाद पुलिस ने तीन मार्च 2020 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और अप्रैल 2020 में मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया था। 20 दिसंबर 2022 मंगलवार को जांच पूरी कर शार्जशीट दायर की है। इस मामले की अगली सुनवाई चार जनवरी 2023 को सेशन जज के सामने होगी।



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