जम्मू कश्मीर: कृषि क्षेत्र के रोडमैप से जम्मू-कश्मीर में खुलेगा निवेश का द्वार, किसान मेले में उमड़ी भीड़

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किसान मेले का शुभारंभ करते अतिथि

किसान मेले का शुभारंभ करते अतिथि
– फोटो : अमर उजाला

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जाने माने कृषि वैज्ञानिक व जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से गठित एपेक्स कमेटी के चेयरमैन डॉ. मंगला राय ने कहा है कि समिति ने कृषि क्षेत्र के विकास का रोडमैप तैयार किया है। सरकार को 29 परियोजनाओं की रिपोर्ट सौंपी गई है जिस पर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होगा।

इन परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में निवेश का दरवाजा खुलेगा। वह शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र आरएस पुरा में अमर उजाला व कृषि विभाग जम्मू की ओर से आयोजित किसान मेला में बोल रहे थे। इस दौरान दूरदराज के किसानों की भीड़ उमड़ी। इसमें महिलाएं भी शामिल रहीं। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाले दर्जनभर किसानों को सम्मानित किया गया। 

पूर्व केंद्रीय सचिव व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. राय ने कहा कि कृषि क्षेत्र की तस्वीर व तकदीर बदलने के लिए हिंदुस्तानी सोच चाहिए। यह पश्चिमी देशों की किताबों को पढ़ने से नहीं आएगा। आज आर्गेनिक व गैर आर्गेनिक कृषि का झगड़ा चल रहा है।

इससे कुछ बनने वाला नहीं है। हमें पोषक तत्वों के असंतुलन को समाप्त करना है। खेतों में कार्बन की प्रचुर मात्रा होगी तो जीवाणु विकसित होगा और पैदावार अच्छी होगी। कार्यक्रम में शेर ए कश्मीर विश्वविद्यालय जम्मू के वाइस चांसलर प्रो. जेपी शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए किसान-वैज्ञानिकों को एक मंच पर आना होगा।

कृषि के लिए रोज हो रहे खोजों को खेतों तक ले जाना होगा। इसके लिए यह जरूरी है कि हमें किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। कृषि विभाग के निदेशक केके शर्मा ने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कृषि क्षेत्र की तस्वीर बिल्कुल बदल जाएगी।

पिछले तीन वर्षों में व्यापक पैमाने पर विकास हुआ है। किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उपयोग करते हुए वे खुशहाल हो रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. रामसेवक, डॉ. एसके गुप्ता, डा. पुनीत चौधरी, डॉ. प्रेम आदि मौजूद रहे। 

पूछने की सामर्थ्य बढ़ने पर किसान हो जाएगा खुशहाल

किसानों से उन्होंने कहा कि हमें समेकित विकास की ओर बढ़ने की जरूरत है। जिस दिन किसान की पूछने की सामर्थ्य बढ़ जाएगी उसी दिन किसान खुशहाल हो जाएगा। विवेक व ज्ञान की तराजू पर किसी भी खेती संबंधी जानकारी को तौलिए, फिर इसके विषय में ज्यादा से ज्यादा पूछिए और तब तक पूछते रहिए जब तक आप संतुष्ट नहीं हो जाते हैं। किसी भी बात से संतुष्ट होने का आपका अधिकार है।  

1972 का फारगूशन ट्रैक्टर रहा आकर्षण

मेले में सुचेतगढ़ इलाके के चंदू चक के किसान बाबू सिंह मैसी फारगूशन ट्रैक्टर के साथ पहुंचे थे। यह ट्रैक्टर 1972 की बनी हुई है तब से बाबू सिंह इससे खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस ट्रैक्टर की खासियत यह है कि यह कभी भी खेतों में मिट्टी में नहीं फंसती, जबकि अन्य ट्रैक्टर फंस जाते हैं। इसमें मिट्टी को निकालने के लिए एक विशेष टूल लगा हुआ है जो टायर से मिट्टी निकालकर राह आसान कर देता है। 

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जाने माने कृषि वैज्ञानिक व जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से गठित एपेक्स कमेटी के चेयरमैन डॉ. मंगला राय ने कहा है कि समिति ने कृषि क्षेत्र के विकास का रोडमैप तैयार किया है। सरकार को 29 परियोजनाओं की रिपोर्ट सौंपी गई है जिस पर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होगा।

इन परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में निवेश का दरवाजा खुलेगा। वह शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र आरएस पुरा में अमर उजाला व कृषि विभाग जम्मू की ओर से आयोजित किसान मेला में बोल रहे थे। इस दौरान दूरदराज के किसानों की भीड़ उमड़ी। इसमें महिलाएं भी शामिल रहीं। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाले दर्जनभर किसानों को सम्मानित किया गया। 

पूर्व केंद्रीय सचिव व महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. राय ने कहा कि कृषि क्षेत्र की तस्वीर व तकदीर बदलने के लिए हिंदुस्तानी सोच चाहिए। यह पश्चिमी देशों की किताबों को पढ़ने से नहीं आएगा। आज आर्गेनिक व गैर आर्गेनिक कृषि का झगड़ा चल रहा है।

इससे कुछ बनने वाला नहीं है। हमें पोषक तत्वों के असंतुलन को समाप्त करना है। खेतों में कार्बन की प्रचुर मात्रा होगी तो जीवाणु विकसित होगा और पैदावार अच्छी होगी। कार्यक्रम में शेर ए कश्मीर विश्वविद्यालय जम्मू के वाइस चांसलर प्रो. जेपी शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए किसान-वैज्ञानिकों को एक मंच पर आना होगा।

कृषि के लिए रोज हो रहे खोजों को खेतों तक ले जाना होगा। इसके लिए यह जरूरी है कि हमें किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। कृषि विभाग के निदेशक केके शर्मा ने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कृषि क्षेत्र की तस्वीर बिल्कुल बदल जाएगी।

पिछले तीन वर्षों में व्यापक पैमाने पर विकास हुआ है। किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उपयोग करते हुए वे खुशहाल हो रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. रामसेवक, डॉ. एसके गुप्ता, डा. पुनीत चौधरी, डॉ. प्रेम आदि मौजूद रहे। 

पूछने की सामर्थ्य बढ़ने पर किसान हो जाएगा खुशहाल

किसानों से उन्होंने कहा कि हमें समेकित विकास की ओर बढ़ने की जरूरत है। जिस दिन किसान की पूछने की सामर्थ्य बढ़ जाएगी उसी दिन किसान खुशहाल हो जाएगा। विवेक व ज्ञान की तराजू पर किसी भी खेती संबंधी जानकारी को तौलिए, फिर इसके विषय में ज्यादा से ज्यादा पूछिए और तब तक पूछते रहिए जब तक आप संतुष्ट नहीं हो जाते हैं। किसी भी बात से संतुष्ट होने का आपका अधिकार है।  

1972 का फारगूशन ट्रैक्टर रहा आकर्षण

मेले में सुचेतगढ़ इलाके के चंदू चक के किसान बाबू सिंह मैसी फारगूशन ट्रैक्टर के साथ पहुंचे थे। यह ट्रैक्टर 1972 की बनी हुई है तब से बाबू सिंह इससे खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस ट्रैक्टर की खासियत यह है कि यह कभी भी खेतों में मिट्टी में नहीं फंसती, जबकि अन्य ट्रैक्टर फंस जाते हैं। इसमें मिट्टी को निकालने के लिए एक विशेष टूल लगा हुआ है जो टायर से मिट्टी निकालकर राह आसान कर देता है। 



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