जम्मू कश्मीर: अब छात्रों के समावेशी विकास के साथ कौशल को मिलेगा बढ़ावा, यह योजना होने जा रही लागू

[ad_1]

Satwari School

Satwari School
– फोटो : निखिल मेहता

ख़बर सुनें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी और निजी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के बीच अंकों की प्रतिस्पर्धा खत्म होगी। दशकों से सफलता का पैमाना मानी जाने वाली शैक्षणिक उत्कृष्टता की परिभाषा भी बदल जाएगी। अब बच्चों के समावेशी विकास के साथ उनमें आलोचनात्मक सोच जैसे उच्च स्तर के कौशल को बढ़ावा मिलेगा। 

स्कूल शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र से छात्र मूल्यांकन और मूल्यांकन योजना (एसएइएस) लागू कर रहा है। इसमें उनके कौशल को तराशा जाएगा ताकि उसे शुरूआती दौर से अपनी सर्वश्रेष्ठता का पता चल सके। एसएइएस के लागू होने से अब बच्चों के मूल्यांकन में भी समानता आएगी। निजी और सरकारी स्कूलों के लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) एक समान प्रश्नपत्र तैयार करेगा। वर्तमान में निजी और सरकारी स्कूलों के प्रश्न पत्रों में बड़ा अंतर होता है जो सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टा को ही बढ़ावा देता है। अब बच्चों में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ कौशल उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया जाएगा। 

छात्र मूल्यांकन और मूल्यांकन योजना (एसएइएस) लागू होने से स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव होगा। निजी और सरकारी स्कूलों के लिए एकसमान प्रश्न पत्र बनने से बच्चों के मूल्यांकन में समानता आएगी। गतिविधि आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों में सीखने की क्षमता का विकास होगा। बच्चों पर दबाव भी कम होगा। -नीरज शर्मा, शिक्षक।

एसएईएस लागू होने से बच्चों में समावेशी ज्ञान होगा। शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ बच्चों के कौशल विकास पर ध्यान दिया जाएगा। अगर विभाग उचित समय और सभी घटकों को इमानदारी से लागू करता है तो ये योजना बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगी। पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों का डेटाबेस तैयार होगा। इसमें सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं बल्कि कौशल उत्कृष्टता को भी महत्व दिया जाएगा। -पवन शर्मा, शिक्षक।

अगर एसएईएस के सभी घटकों का कार्यान्वयन होता है तो ये बच्चों के लिए वरदान होगा। कक्षा एक से आठवीं तक मूल्यांकन प्रक्रिया ही बदल जाएगी। बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक समिति न रखकर उन्हें जीवन की हर चुनौती से सामना करने के योग्य बनाया जाएगा। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों की जिम्मेवारी भी बढ़ेगी। उन्हें बच्चों के समग्र विकास पर काम करना होगा, अब सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता को ही सफलता का पैमाना नहीं माना जाएगा।  -देव राज ठाकुर, शिक्षक।

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सरकारी और निजी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के बीच अंकों की प्रतिस्पर्धा खत्म होगी। दशकों से सफलता का पैमाना मानी जाने वाली शैक्षणिक उत्कृष्टता की परिभाषा भी बदल जाएगी। अब बच्चों के समावेशी विकास के साथ उनमें आलोचनात्मक सोच जैसे उच्च स्तर के कौशल को बढ़ावा मिलेगा। 

स्कूल शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र से छात्र मूल्यांकन और मूल्यांकन योजना (एसएइएस) लागू कर रहा है। इसमें उनके कौशल को तराशा जाएगा ताकि उसे शुरूआती दौर से अपनी सर्वश्रेष्ठता का पता चल सके। एसएइएस के लागू होने से अब बच्चों के मूल्यांकन में भी समानता आएगी। निजी और सरकारी स्कूलों के लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) एक समान प्रश्नपत्र तैयार करेगा। वर्तमान में निजी और सरकारी स्कूलों के प्रश्न पत्रों में बड़ा अंतर होता है जो सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टा को ही बढ़ावा देता है। अब बच्चों में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ कौशल उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया जाएगा। 

छात्र मूल्यांकन और मूल्यांकन योजना (एसएइएस) लागू होने से स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव होगा। निजी और सरकारी स्कूलों के लिए एकसमान प्रश्न पत्र बनने से बच्चों के मूल्यांकन में समानता आएगी। गतिविधि आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बच्चों में सीखने की क्षमता का विकास होगा। बच्चों पर दबाव भी कम होगा। -नीरज शर्मा, शिक्षक।

एसएईएस लागू होने से बच्चों में समावेशी ज्ञान होगा। शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ बच्चों के कौशल विकास पर ध्यान दिया जाएगा। अगर विभाग उचित समय और सभी घटकों को इमानदारी से लागू करता है तो ये योजना बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगी। पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों का डेटाबेस तैयार होगा। इसमें सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं बल्कि कौशल उत्कृष्टता को भी महत्व दिया जाएगा। -पवन शर्मा, शिक्षक।

अगर एसएईएस के सभी घटकों का कार्यान्वयन होता है तो ये बच्चों के लिए वरदान होगा। कक्षा एक से आठवीं तक मूल्यांकन प्रक्रिया ही बदल जाएगी। बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक समिति न रखकर उन्हें जीवन की हर चुनौती से सामना करने के योग्य बनाया जाएगा। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों की जिम्मेवारी भी बढ़ेगी। उन्हें बच्चों के समग्र विकास पर काम करना होगा, अब सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता को ही सफलता का पैमाना नहीं माना जाएगा।  -देव राज ठाकुर, शिक्षक।



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *