जम्मू कश्मीर: पूर्व मंत्री लाल सिंह ने सरकारी घर नहीं किया खाली, अपील करने पर कोर्ट ने ठोका 25 हजार जुर्माना

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सरकारी बंगला खाली करने के लिए दी गई मोहलत पूरी होने के ठीक एक दिन पहले अपील करने पर पूर्व मंत्री लाल सिंह पर हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा, दी गई मोहलत 27 दिसंबर को खत्म होने वाली है।

इससे ठीक पहले आपने याचिका दायर कर कानून की प्रक्रिया को लटकाने का प्रयास किया है। लिहाजा याचिका को खारिज करने के साथ ही 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है। लाल सिंह को छह सप्ताह में सरकारी बंगला खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष अपील कर दी।

अपील खारिज होने पर भी उन्होंने बंगला खाली नहीं किया और अब खंडपीठ के समक्ष दोबारा अपील कर दी। सोमवार को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ताशी राबस्तन और न्यायाधीश राजेश सेकरी की खंडपीठ ने पूर्व मंत्री की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी। 

लाल सिंह ने दलील दी कि उनकी सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। जब तक सुरक्षा की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक उनसे सरकारी बंगला खाली नहीं कराया जाए। अपनी अर्जी में लाल सिंह ने कहा कि उनकी जान को खतरा देखते हुए गृह सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सीआरपीएफ की जेड-सिक्योरिटी की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था।

इस सूची में जो बाकी लोग हैं, उनको सरकारी आवास दिया गया है, लेकिन राजनीतिक पक्षपात के चलते उनसे बंगला खाली कराया जा रहा है। क्योंकि वह विपक्ष से हैं। खंडपीठ ने याचिका के साथ 25 हजार का जुर्माना लगाया, जिसे एडवोकेट वेलफेयर फंड में जमा कराने के लिए कहा। जेएनएफ

दो अलग-अलग विषय हैं सुरक्षा की श्रेणी व आवास 

गांधीनगर में लोक निर्माण विभाग के बंगला नंबर दो को खाली करने के आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। सुरक्षा का पहलू उन्हें आवास की सुविधा के लिए भी पात्रता देता है। कोर्ट ने कहा, सुरक्षा और सरकारी आवास दो अलग-अलग विषय हैं।

जेड श्रेणी की सुरक्षा और उसकी समीक्षा को लेकर नियम तय हैं। इससे जुड़े नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सुरक्षा के पहलू को आधार बनाकर सरकारी आवास भी दे दिया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व ब्यूरोक्रेट सहित अन्य किसी पूर्व माननीय को वैसी आवास सुविधाएं देने का कोई प्रावधान नहीं है, जो उनके पास पद पर रहने के दौरान थीं।

दो बार सांसद, तीन बार विधायक रह चुके हैं लाल सिंह

लाल सिंह दो बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुके हैं। पहले कांग्रेस में रहे लाल सिंह बाद में भाजपा में शामिल हुए। कांग्रेस-पीडीपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे लाल सिंह ने 2014 में भाजपा का दामन थामा। भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार में वे दोबारा मंत्री बनाए गए। 2018 में गठबंधन सरकार से भाजपा के अलग होने से सरकार गिर गई थी। उसके बाद लाल सिंह ने अपना संगठन बनाया, जिसे पार्टी का रूप दिया गया।

एस्टेट विभाग ने साैंपी थी 89 लोगों की सूची

एस्टेट विभाग ने कोर्ट को दी स्टेटस रिपोर्ट में 89 पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के नाम दिए थे, जिनके पास सरकारी आवास सुविधा है। बीते वर्ष फरवरी में हाईकोर्ट ने अनधिकृत रूप से सरकारी आवास में रहने वालों से आवास खाली कराने के निर्देश दिए थे।  

विस्तार

सरकारी बंगला खाली करने के लिए दी गई मोहलत पूरी होने के ठीक एक दिन पहले अपील करने पर पूर्व मंत्री लाल सिंह पर हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा, दी गई मोहलत 27 दिसंबर को खत्म होने वाली है।

इससे ठीक पहले आपने याचिका दायर कर कानून की प्रक्रिया को लटकाने का प्रयास किया है। लिहाजा याचिका को खारिज करने के साथ ही 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है। लाल सिंह को छह सप्ताह में सरकारी बंगला खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष अपील कर दी।

अपील खारिज होने पर भी उन्होंने बंगला खाली नहीं किया और अब खंडपीठ के समक्ष दोबारा अपील कर दी। सोमवार को कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ताशी राबस्तन और न्यायाधीश राजेश सेकरी की खंडपीठ ने पूर्व मंत्री की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए याचिका खारिज कर दी। 

लाल सिंह ने दलील दी कि उनकी सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है। जब तक सुरक्षा की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक उनसे सरकारी बंगला खाली नहीं कराया जाए। अपनी अर्जी में लाल सिंह ने कहा कि उनकी जान को खतरा देखते हुए गृह सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सीआरपीएफ की जेड-सिक्योरिटी की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया था।

इस सूची में जो बाकी लोग हैं, उनको सरकारी आवास दिया गया है, लेकिन राजनीतिक पक्षपात के चलते उनसे बंगला खाली कराया जा रहा है। क्योंकि वह विपक्ष से हैं। खंडपीठ ने याचिका के साथ 25 हजार का जुर्माना लगाया, जिसे एडवोकेट वेलफेयर फंड में जमा कराने के लिए कहा। जेएनएफ

दो अलग-अलग विषय हैं सुरक्षा की श्रेणी व आवास 

गांधीनगर में लोक निर्माण विभाग के बंगला नंबर दो को खाली करने के आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व मंत्री ने कहा, उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। सुरक्षा का पहलू उन्हें आवास की सुविधा के लिए भी पात्रता देता है। कोर्ट ने कहा, सुरक्षा और सरकारी आवास दो अलग-अलग विषय हैं।

जेड श्रेणी की सुरक्षा और उसकी समीक्षा को लेकर नियम तय हैं। इससे जुड़े नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि सुरक्षा के पहलू को आधार बनाकर सरकारी आवास भी दे दिया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व ब्यूरोक्रेट सहित अन्य किसी पूर्व माननीय को वैसी आवास सुविधाएं देने का कोई प्रावधान नहीं है, जो उनके पास पद पर रहने के दौरान थीं।

दो बार सांसद, तीन बार विधायक रह चुके हैं लाल सिंह

लाल सिंह दो बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुके हैं। पहले कांग्रेस में रहे लाल सिंह बाद में भाजपा में शामिल हुए। कांग्रेस-पीडीपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे लाल सिंह ने 2014 में भाजपा का दामन थामा। भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार में वे दोबारा मंत्री बनाए गए। 2018 में गठबंधन सरकार से भाजपा के अलग होने से सरकार गिर गई थी। उसके बाद लाल सिंह ने अपना संगठन बनाया, जिसे पार्टी का रूप दिया गया।

एस्टेट विभाग ने साैंपी थी 89 लोगों की सूची

एस्टेट विभाग ने कोर्ट को दी स्टेटस रिपोर्ट में 89 पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के नाम दिए थे, जिनके पास सरकारी आवास सुविधा है। बीते वर्ष फरवरी में हाईकोर्ट ने अनधिकृत रूप से सरकारी आवास में रहने वालों से आवास खाली कराने के निर्देश दिए थे।  



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