Varanasi: चार साल में बालिका वधू बनने से बच गईं 39 किशोरियां, पांच साल में घट गया बाल विवाह का ग्राफ

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बाल विवाह की सांकेतिक तस्वीर

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बाल विवाह पर अंकुश लगाए जाने को लेकर किए जा रहे प्रयासों का असर दिखने लगा है। वाराणसी जिले में पिछले चार साल में एक दो नहीं बल्कि जिले में ऐसी 39 किशोरियां हैं, जिनको बालिका वधू बनने से बचा लिया गया। यही नहीं बाल विवाह का ग्राफ भी कम हो गया है।

बाल विवाह रोकने के लिए बाल संरक्षण इकाई की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसमें लोगों से अभियान की सफलता के लिए आगे आने की अपील की जाती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय का कहना है कि बदलते समय के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आया है।

बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहीं बेटियां

कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं की मदद से शिक्षित होकर बेटियां अब खुद भी बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई की संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह ने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन, संबंधित थाने की पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से बीते चार वर्ष में बाल विवाह रोकने के 39 मामलों में सफलता मिली है।

वर्ष 2019-20 में 12, 2020-21 में 10, 2021-22 में 11 व वर्ष 2022-23 में अब तक बाल विवाह की छह कोशिशों को नाकाम किया गया है। बाल विवाह रोकने के बाद उनके अभिभावकों ने बाल कल्याण समिति के समक्ष शपथ पत्र दाखिल किया है कि वह अपने बच्चों की शादी तभी करेंगे, जब वह बालिग हो जाएंगे। 

बाल संरक्षण अधिकारी निरूपमा सिंह ने बताया कि बालक का विवाह 21 साल, बालिका की उम्र 18 साल होने के बाद ही किया जा सकता  है। यदि कोई भी व्यक्ति इस निर्धारित उम्र से पहले शादी करता है तो उसे बाल विवाह कहा जाता है। भले ही वह सहमति से ही क्यों न किया गया हो। सहमति से किया गया बाल विवाह भी कानूनी रूप से वैध नहीं होता। ऐसे में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम -2006 के तहत बाल विवाह होने पर दो वर्ष की सजा अथवा एक लाख का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

1098 के अलावा 181 महिला हेल्प लाइन, जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, जिला बाल संरक्षण इकाई तथा बाल कल्याण समिति को भी बाल विवाह की सूचना दी जा सकती है।

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बाल विवाह पर अंकुश लगाए जाने को लेकर किए जा रहे प्रयासों का असर दिखने लगा है। वाराणसी जिले में पिछले चार साल में एक दो नहीं बल्कि जिले में ऐसी 39 किशोरियां हैं, जिनको बालिका वधू बनने से बचा लिया गया। यही नहीं बाल विवाह का ग्राफ भी कम हो गया है।

बाल विवाह रोकने के लिए बाल संरक्षण इकाई की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसमें लोगों से अभियान की सफलता के लिए आगे आने की अपील की जाती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय का कहना है कि बदलते समय के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आया है।

बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहीं बेटियां

कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं की मदद से शिक्षित होकर बेटियां अब खुद भी बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं। जिला बाल संरक्षण इकाई की संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह ने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन, संबंधित थाने की पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से बीते चार वर्ष में बाल विवाह रोकने के 39 मामलों में सफलता मिली है।



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