बिहार के छोटे से गांव फटिकवारा में जन्मे इस शख्स ने अभावों के अंधेरों को चुनौती देते हुए मेहनत की धुरी पर खुद का सूरज गढ़ा । इस सूरज के उजास में आज आईएएस अधिकारी बन समय और समाज में रौशनी भरने के साथ ही वे लाखों छात्रों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। उनकी संस्था मिशन 50 IAS गुदड़ी के लालों को मुफ्त कोचिंग देती है। अब तक यहां से कोचिंग लेकर सैकड़ों छात्रों ने सफलता का सुनहरा आकाश छूआ है। , सहज , सरल और सरस व्यक्तित्व के धनी डॉ रणजीत कुमार सिंह की प्रेरणा देती यह कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए।
मेरी पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। परिवार की आर्थिक आमदनी का जरिया खेती – किसानी था। आमदनी अति साधारण थी। जरूर की छोटी छोटी चीजें भी पूरा कर पाना एक सपना जैसा होता। हां एक चीज बड़ी जरूर थी और वह था हौसला। यह हौसला मेरे पिताजी में भी था और दादाजी में भी।
कभी कभी एक छोटी सी बात आपका जीवन बदल देती है ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ ।मेरे दादाजी ने एक दिन मुझसे कहा कि अगर बनना है तो आईएएस बनो वरना फिर खेती – किसानी करो। यह तब की बात है जब मैं छट्ठी कक्षा में पढ़ता था। ऐसी बातें अमूमन अभिभावक अपने बच्चों से कई बार कहते हैं पर मेरे अंदर यह बात दिल और दिमाग दोनों जगह बैठ गयी। मैंने उसी वक्त मन में प्रण कर लिया की बनूंगा तो आईएएस ही। यूं कहें कि यही मेरी सफलता का बीज था जो धीरे- धीरे अंकुरित होता गया। कहते हैं आईएएस अधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह।

10 साल तक तलाश की यह किताब
डॉ रणजीत कुमार सिंह कहते हैं कि मन में आईएएस बनने की लगन तो जग चुकी थी पर कोई राह बताने वाला था नहीं, ऐसे में मैंने ‘आईएएस कैसे बनें ‘ पुस्तक ढुंढना शुरू किया। मैं अपने पास के शहर हाजीपुर जाता और हर बुक स्टॉल पर यह किताब ढूंढता। मैंने दस सालों तक यह किताब ढूंढी। यह किताब तो नहीं मिली पर बुक स्टॉल पर रखी अन्य किताबों , मैगजीन और अखबारों से मैंने UPSC की तैयारी की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। इसका मुझे बहुत आगे चलकर फायदा मिला।

इस क्लास से ही करने लगे UPSC की तैयारी
डॉ रणजीत कुमार सिंह आगे बताते हैं कि मैंने अपने दादाजी श्री नारायण सिंह की बात गांठ बांध ली। आपको शायद यकीन न हो कि मैंने छट्ठी कक्षा से ही आईएएस अधिकारी बनने की तैयारी भी शुरू कर दी। मै अपनी क्लास से आगे की किताबें पढ़ जाता। कई बार मुझे शिक्षक उपर की क्लास के छात्रों की समस्या हल करने के लिए बुलाया करते। इसी समय से मैं ज्यादा से ज्यादा वक्त पढ़ाई पर देने लगा।

पढाई में हमेशा रहे टॉप
डॉ रणजीत कुमार सिंह पढ़ाई में हमेशा अव्वल आते रहें। वो इसका श्रेया अपने माता पिता को देते हैं। वें कहते हैं कि माताजी महादेव पटेल और पिताजी रामटहल सिंह का आशीष हमेशा मुझे आगे बढ़ाता रहा।
उन्होंने बारहवीं की पढ़ाई विज्ञान विषय से पास की। फिर पटना विश्वविद्यालय से इतिहास विषय से बीए आनर्स किया। इसके बाद में एम. ए . भी इतिहास से ही किया। इन्होंने दुनिया के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पर पीएचडी के दौरान शोध किया। इनके शोध का विषय था “रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक एपीजे अब्दुल कलाम”।

लॉज में बीते वें दिन
डॉ रणजीत कुमार कहते हैं कि जब पढ़ाई और UPSC की तैयारी के लिए पटना आया तो मेरे पास काफी आर्थिक तंगी थी। उस वक्त एक पटना के एक लॉज के छोटे से कमरे में मैं दोस्तों के साथ रहकर तैयारी करता था। मैंनै कभी UPSC कोचिंग क्लास ज्वाइन नहीं किया । खुद से ही तैयारी की। कहते हैं न जहां चाह वहां राह और आखिर रिजल्ट का वह दिन भी आया जब मैं पास हो गया था। फिर लॉज में साथ रह रहे दोस्तों ने मुझे खीर खिलाकर मुंह मीठा कराया। काफी भावुक था वह पल ।

जब कलाम साहब से हुई मुलाकात
डॉ रणजीत कुमार सिंह पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से काफी प्रभावित रहे हैं। उन्होंने छात्र जीवन में डॉ कलाम की पुस्तक ‘अग्नि की उड़ान’ कई बार पढ़ी। वें डॉ कलाम को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। जब डॉ रंजीत कुमार गुजरात के कच्छ में एसडीएम के तौर पर तैनात थे तो वहां आयोजित होने वाले रण उत्सव में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम मुख्य अतिथि के रूप में वहां आए। इसी दौरान डॉ रंजीत कुमार की मुलाकात कलाम साहब से हुई। जब डॉ कलाम को यह जानकारी मिली कि डॉ रणजीत कुमार सिंह ने उनके उपर ही शोध किया है तो उन्होंने डॉ रणजीत कुमार को राष्ट्रपति भवन आने का आमंत्रण दिया। बाद में डॉ रणजीत कुमार राष्ट्रपति भवन गए और काफी समय डॉ कलाम के सानिध्य में बिताया।
नर्मदा को बनाया स्वच्छ
डॉ रणजीत कुमार सिंह जब गुजरात के नर्मदा जिले के डीएम बनाए गए तो इन्होंने वहां काफी लगन से कार्य किया। डॉ रंजीत कुमार सिंह की मेहनत और दुरदृष्टी से नर्मदा गुजरात का पहला पूर्ण ODF जिला बन गया। इसके लिए डॉ रणजीत कुमार सिंह की न सिर्फ देश भर में चर्चा हुई बल्कि महात्मा गांधी स्वच्छता पुरस्कार और राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किया गया।

सीतामढ़ी बना पहला पूर्ण ODF जिला
डॉ रणजीत कुमार सिंह को जब बिहार के सीतामढ़ी की कमान सौंपी गई तो बतौर जिला पदाधिकारी उन्होंने इस जिले को देश के मानचित्र पर चर्चित बना दिया। सीतामढ़ी स्वच्छता में नया मुकाम बना बिहार का पहला पूर्ण ODF जिला बन गया। इसके साथ ही उन्होंने 40 लाख पौधा रोपण कर भी एक रिकार्ड बनाया।

इन सब के साथ ही सीतामढ़ी परिवार नियोजन के NSU में देश का अव्वल जिला बन गया। इसके लिए इन्हें वर्ल्ड लीडरशिप अवार्ड प्रदान किया गया। वहीं इनकी सकारात्मक पहल से वर्ल्ड सेनिटेशन डे पर देश के 8 में से 7 पुरस्कार बिहार की झोली में आएं। वर्ल्ड डॉल्फिन डे के अवसर पर भी डॉ रणजीत कुमार सिंह को पटना में पुरस्कृत किया गया।

ऐसे बनी मिशन 50
डॉ रणजीत कुमार सिंह ने साल 2010 में मिशन 50 IAS की स्थापना की। मिशन 50 IAS के तहत बिहार के वैसे छात्रों को सिविल सर्विसेज के प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग दी जाती है जिनके अंदर चाहत तो होती है पर आर्थिक रूप से वें इतने सक्षम नहीं होते कि महंगे कोचिंग का खर्चा उठा पाए।
डॉ रणजीत कुमार सिंह यह कहते हैं कि मैंने तैयारी के दौरान जो मुसीबतें झेलनी मैं नहीं चाहता कि हमारे दूसरे गरीब छात्रों को भी यह सब झेलना पड़े, इसी कारण मैंने मिशन 50 IAS की स्थापना की।

शानदार प्रदर्शन कर रहा मिशन 50
अपनी स्थापना काल से ही मिशन 50 IAS शानदार प्रदर्शन कर रहा है। यहां से सैकड़ों छात्रों ने सफलता का परचम लहराया है। आज 500 से ज्यादा छात्र ऑफलाइन और 3 लाख से ज्यादा छात्र ऑनलाइन मिशन 50 से जुड़कर लाभ ले रहे हैं। यहां छात्रों के लिए एक बेहतर लाईब्रेरी भी बनाई गई है जिसमें हजारों पुस्तकें उपलब्ध हैं। हाल में ही UPSC 2020 टॉपर शुभम कुमार ने भी मिशन 50 IAS से ही तैयारी की थी। डॉ रणजीत कुमार सिंह सोशल मीडिया द्वारा भी उम्दा विचारों से लोगों में नयी सकारात्मक चेतना भरने का कार्य कर रहे हैं।

चाहत अनाथ बच्चों के हॉस्टल बनाने की
डॉ रणजीत कुमार सिंह अब अनाथ बच्चों के लिए हॉस्टल बनाने की मुहिम की कोशिश में जुटे हैं। यह वैसे बच्चों का आशियाना होगा जिन्होंने सर से माता- पिता का साया हट चुका है।

पंचायत के जनप्रतिनिधियों को कुशल बनाना प्राथमिकता
डॉ रणजीत कुमार सिंह फिलवक्त बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के निदेशक है। वे कहते हैं कि मैं बिहार की पंचायत के जनप्रतिनिधियों को कुशल बनाना चाहता हूं। पंचायतों को टेक्नोलॉजी से जोड़ना मेरी प्राथमिकता है। बिहार के सभी पंचायतों में जल्द ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही स्ट्रीट सोलर लाइट भी लगाए जाएंगे। मेरी कोशिश है कि मैं पंचायतों के जनप्रतिनिधियों को इस तरह से प्रशिक्षित करूं कि वे किसी भी लोभ- लालच में न फंसकर पंचायत की बेहतरी के लिए कार्य करें ताकि गांधीजी के ग्राम स्वराज का सपना सही अर्थों में साकार हो सकें।

जीवनसंगिनी का हर कदम पर सहयोग
डॉ रणजीत कुमार सिंह बताते हैं कि जीवन के हर कदम पर जीवन संगिनी निशा रंजीत कुमार सिंह का साथ मिलता है। कठीन वक्त में वो हमेशा हौसला देती हैं। निशा बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग में OSD के पद पर कार्यरत हैं। पहले वह सीतामढ़ी में कार्यरत थी सीतामढ़ी में ही डॉ रणजीत कुमार सिंह और निशा में प्यार हुआ और फिर दोनों विवाह के बंधन में बंध गए।

नन्हे रुद्रांश ने बढ़ाई खुशियां
डॉ रणजीत कुमार कहते हैं कि घर में बेटे रुद्रांश के आने से खुशियां बढ़ गयी है। घर पहुंचते ही बेटे की नन्ही खिलखिलाहट हर तनाव को दूर कर देती है। इससे घर का माहौल हमेशा उत्सव जैसा रहता है।

लोगों का प्यार ही मेरी कमाई
डॉ रणजीत कुमार सिंह कहते हैं कि लोगों का प्यार ही मेरी असली कमाई है। जब मेरे द्वारा पढ़ाया गया कोई छात्र सफ़ल हो कर मिलने आता है तो काफी खुशी होती है। वें कहते हैं कि हर इंसान का कर्म ही सदा जीवित रहता है इसलिए मैं चाहता हूं कि हर पल बेहतर कार्य करूं। कुछ ऐसा करूं कि मेरे ना रहने के बाद भी लोग मुझे याद रखें।
असफलता से न घबराएं युवा

डॉ रणजीत कुमार सिंह यह भी कहते हैं कि छात्रों को असफलताओं से घबराने की जरूरत नहीं है। असफलता ही सफलता का मार्ग खोलती है। वह आपको तौलने के लिए आती है। पहले जरूरी है कि आर्थिक समस्याओं पर काबू पाना। इसके लिए पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब भी किया जा सकता है।

वे छात्रों को यह सलाह भी देते हैं कि बिहार में जनसंख्या घनत्व ज्यादा है अगर बाहर भी बेहतर अवसर मिले तो वहां जाना चाहिए।
वें आगे कहते हैं कि मोमबत्ती की तरह जीवन घट रहा है समय को जाया न करें। उत्साही बने रहे लक्ष्य जरुर मिलेगा।
किसी भी परिस्थिति में ना घबराने को अपना सबल पक्ष और भावुकता को कमजोर पक्ष मानने वाले आईएएस अधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह मशीन बनती मनुष्यता के घनघोर तिमिर में इंसानियत की दीपशिखा प्रज्वलित करने में जुटे हैं ताकि सत्यम, शिवम, सुंदरम की मधुर धुन फिजा में घुल उस गुलशन को सदियों तक गुलजार करती रहे जिसे जीवन कहते हैं।
(डॉ रणजीत कुमार सिंह से बातचीत के आधार पर यह आलेख तैयार किया है विवेक चंद्र ने। आपको यह कहानी कैसी लगी कमेंट कर हमें जरूर बताएं। आपके सुझाव भी सादर आमंत्रित हैं।)