Delhi: एम्स के डॉक्टरों का दावा- ब्रेल से जल्द बजती है दिमाग की घंटी, हाथों से मस्तिष्क तक पहुंचते हैं सिग्नल

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ब्रेल लिपि

ब्रेल लिपि
– फोटो : Istock

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दृष्टिबाधित दिव्यांग अगर ब्रेल लिपि का प्रयोग करता है तो उसका मानसिक और कौशल विकास अधिक होता है। ब्रेल विधि में हाथों से मिलने वाला सिग्नल दिमाग तक जाता है जो दिव्यांगों में सीखने और समझने की क्षमता को बढ़ता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद और नेत्र विज्ञान केंद्र में सामुदायिक नेत्र विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. सूरज सिंह सेंजम ने कहा कि रिसर्च बताती है कि जिन दृष्टिबाधित दिव्यांगों ने ब्रेल का इस्तेमाल किया उनमें सीखने, समझने की क्षमता ज्यादा पाई गई है। ब्रेल लिपि से पढ़ाई के दौरान हाथ से सिग्नल दिमाग तक जाता है, जिससे सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ काफी कुछ डिजिटल हो रहा है, लेकिन कक्षा सात तक अगर ब्रेल से पढ़ाई होती है तो उनमें सीखने की क्षमता ज्यादा होगी। उसके बाद ऑडियो बुक का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होता है।

देश में 50 लाख से अधिक है दृष्टिबाधित दिव्यांग
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अनुसार देश में दृष्टिबाधित दिव्यांगों की संख्या 50 लाख है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार उनकी असल संख्या 50,33,431 है। इनमें से पुरुष 26,39,028 और महिला 23,94,403 हैं।

सुविधा के लिए कई एप
डॉ. सूरज ने बताया कि दृष्टिबाधित दिव्यांगों की मदद के लिए कई मोबाइल एप आ चुके हैं। इन एप की मदद से रंगों की पहचान, पेपर पढ़ना, नोट को पहचानना व गिन पाना आदि संभव है। इनके अलावा एम्स में बनाए गए लैब में इसे लेकर रिसर्च चल रही है।

एम्स में रोज आते हैं 15-18 मरीज
डॉ. सूरज ने बताया कि एम्स के पुनर्वास विभाग में रोजाना 15-17 मरीज आते हैं। एम्स के डॉक्टर व अन्य इन्हें ब्रेल व अन्य माध्यम से बेहतर तरीके सिखा रहे हैं। साथ ही ऐसे दिव्यांगों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जाता है।

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दृष्टिबाधित दिव्यांग अगर ब्रेल लिपि का प्रयोग करता है तो उसका मानसिक और कौशल विकास अधिक होता है। ब्रेल विधि में हाथों से मिलने वाला सिग्नल दिमाग तक जाता है जो दिव्यांगों में सीखने और समझने की क्षमता को बढ़ता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद और नेत्र विज्ञान केंद्र में सामुदायिक नेत्र विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. सूरज सिंह सेंजम ने कहा कि रिसर्च बताती है कि जिन दृष्टिबाधित दिव्यांगों ने ब्रेल का इस्तेमाल किया उनमें सीखने, समझने की क्षमता ज्यादा पाई गई है। ब्रेल लिपि से पढ़ाई के दौरान हाथ से सिग्नल दिमाग तक जाता है, जिससे सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ काफी कुछ डिजिटल हो रहा है, लेकिन कक्षा सात तक अगर ब्रेल से पढ़ाई होती है तो उनमें सीखने की क्षमता ज्यादा होगी। उसके बाद ऑडियो बुक का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होता है।



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