Kanjhawala Case : …अब हमारे लिए कभी नहीं आएगी नए साल की सुबह, जाना था गुरुद्वारा पर चली गई जान

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अब हमारे परिवार के लिए नए साल की सुबह कभी नहीं आएगी। साल की आखिरी शाम घर से निकली अंजलि नए साल की सुबह भी वापस नहीं लौटी। साल की पहली तारीख को परिवार हर बार की तरह गुरुद्वारा बंगला साहिब जाने की तैयारी कर रहा था। तभी अंजलि के दुनिया से चले जाने की खबर आई। अब बेटी ही नहीं, ताउम्र के लिए पूरे परिवार की नए साल की सुबह नहीं आएगी।

अंजलि की मौत ने पूरे परिवार के लिए नए साल की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली। बकौल अंजलि की मां रेखा, पूरी रात बेटी के घर लौटने का इंतजार करते रहे। हर बार नए साल पर गुरुद्वारा बंगला साहिब जाते थे। इस बार भी अंजलि के मामा ने कहा था कि कैब से सभी लोग साथ चलेंगे। इसके लिए सभी तैैयारी भी हो चुकी थी, लेकिन नए साल की वो सुबह परिवार को मातम का संदेेश मिला।

31 दिसंबर को दोपहर बाद घर से काम के सिलसिले में गई। शाम करीब 7.30 बजे फोन पर परिजनों से हुई बातचीत में घर पर खाना बनाने से मना करते हुए कहा कि वह सभी के लिए खाना बाहर से लेकर आएगी। रात करीब 9:30 बजे उसने दोबारा फोन कर कहा, उसे अभी और वक्त लगेगा खाना खा लो। बहन गुनगुन ने बताया कि रात करीब 10 बजे अंजलि को फोन करने पर मोबाइल स्विच ऑफ था। 

 

नए साल पर अधिक काम होने की वजह से अंजलि ने रात 2-3 बजे लौटने की बात कही थी। मां ने बताया कि इसके बाद घर के सभी सदस्य उसके लौटने का इंतजार कर रहे। लेकिन काफी देर बाद भी जब बेटी नहीं लौटी तो इंतजार पर फिक्र हावी होने लगा। नानी कांता ने बताया कि सुबह जब पुलिस वाले का फोन आया तो उन्होंने बताया कि बेटी का एक्सिडेंट हो गया है। अंजलि की मां की तबियत ठीक नहीं होने की बात कही तो पुलिस ने कहा कि गाड़ी भेज देते हैं।

 

अंजलि को परिवार की इतनी फिक्र थी कि काम में व्यस्त होने पर भी लगातार मां, भाई बहनों के खाने की चिंता सताती रही। बार बार फोन किया। लेकिन फोन के स्विच ऑफ होने के परिवार के सभी सदस्य इंतजार करते रहे और किसी को खाने की सुध नहीं रही। इसके बाद न तो खाना मंगवाया और न ही रात को किसी ने खाना खाया।



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