[ad_1]
बार-बार बदलना पड़ रहा नंबर
आईएमए के उपाध्यक्ष और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों के चश्मे के नंबर बार-बार बदलने पड़ रहे हैं। जबकि, पहले ऐसी दिक्कतें नहीं होती थीं। एक बार अगर किसी को चश्मा लग गया तो कम से तीन साल तक उसे चश्मे का नंबर नहीं बदलना पड़ता था, लेकिन अब छह माह के अंदर ही चश्मे का नंबर बदलना पड़ रहा है। बताया कि हाइपर मेट्रापिया में प्लस और मायोपिया में माइनस नंबर के चश्मे मरीजों को लगाने पड़ रहे हैं।
सामान्य आंखों की साइज
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कोविड के बाद यह बीमारी तेजी से बच्चों में देखने को मिली है। जबकि, पहले यह मायोपिया और हाइपर मेट्रोपिया 35 वर्ष से ऊपर के लोगों में देखने को मिलती थी। बताया कि सामान्य आंखों की साइज 20 से 23 मिलीमीटर होती है। जबकि, पुतली की साइज 10 से 12 मिलीमीटर होती हैं। यह साइज तीन वर्ष से लेकर जवान होने तक की है। वहीं, बीमारी की बात करें तो 18 से 19 मिलीमीटर आंखों की साइज और आठ से नौ मिलीमीटर पुतलियों की साइज देखने को मिल रही है।
फैक्ट फाइल
आंखों की साइज 20 से 23 मिलीमीटर।
पुतली की साइज 20 से 12 मिलीमीटर।
आंखों पर दबाव बढ़ने पर मांसपेशियों फैलने और घटने लगती है।
एक मिमी आंख बड़ी होने पर चश्मे का दो नंबर आमतौर पर बढ़ता है।
[ad_2]
Source link