पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की तरह ही पूर्व राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी का सभी राजनीतिक दलों में खासा सम्मान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना जिगरी दोस्त बताते थे। दोनों के दल भले ही विपरीत विचारधारा के हो लेकिन विधानसभा में इन दोनों ही नेताओं ने कभी भी एक दूसरे को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
केसरीनाथ त्रिपाठी का राजनीतिक कैरियर काफी लंबा रहा। वह छह बार विधायक रहे। तीन बार होने विधानसभा अध्यक्ष बनने का भी गौरव हासिल हुआ। विधान सभा में उनके साथ ही रहे पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर बताते हैं कि आज वह हमारे बीच में भले ही ना हो उनकी यादें हमेशा दिलों में रहेंगी।
केसरीनाथ त्रिपाठी का व्यक्तित्व भी बड़ा शानदार रहा। वह अच्छे राजनेता तो थे ही साथ ही अच्छे अधिवक्ताओं में भी उनकी गिनती होती रही है। पश्चिमी बंगाल का राज्यपाल का 5 साल का सफल कार्यकाल पूरा करने के बाद जब वो प्रयागराज आए तो उन्होंने वकालत में दिलचस्पी दिखाई। हालांकि उम्र ज्यादा हो जाने की वजह से वह फाइलें तो ज्यादा नहीं पढ़ पाते थे लेकिन अगर कोई उनसे कानूनी राय मशवरा लेता था तो वह उसे उचित सलाह जरूर देते थे।
केसरीनाथ अच्छे कवि भी माने जाते थे। उनके द्वारा तमाम किताबें भी लिखी गई। उनके भांजे शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि पंडित जी ने दो दर्जन से ज्यादा किताबे लिखी हैं। 2020 में हुए कोरोना की वजह से वह कम सुनने लगे थे। हालांकि अपने सारे काम वह खुद ही करते थे।
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की तरह ही पूर्व राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी का सभी राजनीतिक दलों में खासा सम्मान था। प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना जिगरी दोस्त बताते थे। दोनों के दल भले ही विपरीत विचारधारा के हो लेकिन विधानसभा में इन दोनों ही नेताओं ने कभी भी एक दूसरे को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
केसरीनाथ त्रिपाठी का राजनीतिक कैरियर काफी लंबा रहा। वह छह बार विधायक रहे। तीन बार होने विधानसभा अध्यक्ष बनने का भी गौरव हासिल हुआ। विधान सभा में उनके साथ ही रहे पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर बताते हैं कि आज वह हमारे बीच में भले ही ना हो उनकी यादें हमेशा दिलों में रहेंगी।