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हाइड्रोलॉजी के वैज्ञानिकों ने पानी के नमूने ले लिए हैं। अब वे दोनों जगह के नमूनों के सिग्नेचर का मिलान करेंगे। इससे पता चलेगा कि जोशीमठ में रिसाव का इस टनल से कोई कनेक्शन है या नहीं। जोशीमठ में तेजी से हो रहे भू-धंसाव के पीछे स्थानीय लोग एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की टनल निर्माण को जिम्मेदार मान रहे हैं।
उनका यह भी आरोप है कि टनल की वजह से ही पानी उनके घरों तक पहुंच गया है। जोशीमठ के लोगों के टनल की वजह से भू-धंसाव के आरोपों से एक सप्ताह में पर्दा हट जाएगा। रुड़की के राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कृष्ण, ने बीते दो दिन जोशीमठ, टनल और दोनों के बीच दो अन्य रिसावों के सैंपल एकत्र किए।
एनआईएच के वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन भी शुरू कर दिया है। इस संस्थान का मकसद ही जलविज्ञान के समस्त पहलुओं पर वैज्ञानिक कार्यों में सहयोग देना और व्यवस्थित रूप से इनका समन्वयन करना है।
इसी एनएचआई की टीम ने जोशीमठ के मकानों से रिस रहे पानी और टनल के भीतर जाकर वहां के पानी, बाहर बह रहे पानी के अब तक कोई आधा दर्जन सैंपल लिए हैं।
एनआईएच के वैज्ञानिक डॉ. गोपाल कृष्ण ने अमर उजाला को बताया कि चारों सैंपल का अध्ययन किया जाएगा। इनका पीएफ और आईसोटॉप देखे जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि टनल से बहने वाले पानी और जोशीमठ के मकानों में आ रहे पानी में कोई समानता है या नहीं।
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