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शास्त्रीनगर में गोल्डन टावर की पांचवीं मंजिल से कूदकर अवनी ने जान दे दी। बेटी की आत्महत्या के बाद अवनी के शव का परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। उसके शव का अंतिम संस्कार बृज घाट पर किया गया और चाचा चिराग ने चिता को मुखाग्नि दी।
मूल रूप से मुंडाली के गांव आड़ के रहने वाले व्यापारी बृजभूषण के चार पुत्र हैं। बड़े बेटे रोहित परिवार के साथ शास्त्रीनगर स्थित गोल्डन टावर में फ्लैट रहते हैं। परिवार में पत्नी आकांक्षा, बेटा शिवा है और बेटी अवनी थी। रोहित के तीन भाई चिराग, आशु और विशाल खरखौदा में रहते हैं। अवनी इन चारों भाइयों की लाड़ली थी। रोहित, चिराग के साथ कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं जबकि आशु और विशाल हार्डवेयर व्यापारी हैं। शिवा कैंट स्थित दीवान स्कूल का छात्र है।
पुलिस के अधिकारियों को फोन करके कहा कि बेटी का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते। यह हादसा है, उनको कोई शिकायत नहीं देनी। बेटी तनाव में थी, इसकी जानकारी माता-पिता को पहले से थी। अवनी ने ऐसा कदम उठाया कि परिवार सदमे में है। माता-पिता को परिवार के लोग संभालने में लगे रहे, लेकिन वे गुमसुम हैं। एसएसपी रोहित सजवाण ने बताया कि परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम और अन्य कार्रवाई नहीं कराई है।
स्कूल जाने की बात कहकर गई थी
परिवार ने बताया कि अवनी सुबह 9:30 बजे अपनी मां आकांक्षा से स्कूल जाने की बात कहकर फ्लैट से गई थी। सफाई कर्मचारी और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के अनुसार सुबह 10:30 बजे अवनी को नीचे पड़ा देखा। सोसायटी के एक युवक ने बताया कि अवनी 40-45 मिनट छत पर घूमती रही। हेलमेट और स्कूल बैग भी छत पर रखा था। अंदेशा है कि काफी देर घूमने के बाद ही अवनी छत से कूदी है। इस दौरान अवनी की किसी से बात हुई या नहीं। इसकी जानकारी भी पुलिस जुटाने में लगी है। वहीं, यह भी बताया गया है कि सोसायटी के एक बुजुर्ग की मौत बीमारी के चलते रविवार रात एक निजी अस्पताल में हो गई थी। सोसायटी के पदाधिकारी और स्थानीय लोग श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े थे। कुछ लोगों ने अवनी की चीख सुनी। काफी देर तक उन्हें कुछ समझ नहीं आया। बाद में घटना का पता चला।
विद्यालय में भी शोक जताया
अवनी की मौत की जानकारी के बाद उसके स्कूल में भी शिक्षकों और सहपाठियों ने शोक जताया। कुछ सहपाठियों ने बताया कि पिछले माह प्री-बोर्ड परीक्षा में अवनी ने अच्छे अंक पाए थे और बोर्ड की तैयारियों के बारे में वह अक्सर बातें करती थी। प्रधानाचार्य सपना आहूजा ने कहा कि परीक्षा को लेकर प्रत्येक विद्यार्थी को काउंसलर का नंबर दिया गया था, तनाव जैसी कोई स्थिति नहीं थी। शिक्षक और सहपाठी मंगलवार को अवनी के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
पांचवीं मंजिल तक कैसे पहुंची अवनी, उठे सवाल
अवनी पांचवीं मंजिल पर कैसे पहुंची, इसे लेकर सोसायटी के लोग भी सवाल उठा रहे हैं। सोसायटी में सिक्योरिटी गार्ड और सफाई कर्मचारी हैं। इसके बावजूद स्कूल ड्रेस में छात्रा कैसे वहां तक पहुंच गई। लोगों का कहना कि सुरक्षा के मद्देनजर भी वहां पर कोई सुविधा नहीं है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कभी कोई शिकायत नहीं की गई। सोसायटी के सचिव एवं पूर्व प्रिंसिपल डॉ. डीके जैन का कहना कि अवनी बहुत ही हंसमुख थी। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इससे सभी हैरान हैं।
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