Lucknow: मानचित्र शुल्क 20 गुना हुआ, जिला पंचायत को मिला अवैध निर्माण तोड़ने का अधिकार

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प्रतीकात्मक तस्वीर

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– फोटो : istock

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लखनऊ जिला पंचायत का बिल्डिंग बाइलॉज 36 साल बाद बदल गया है। इसमें बिना नक्शा स्वीकृत कराए गए अवैध निर्माण तोड़ने की शक्तियां जिला पंचायत को मिल गई हैं। वहीं, आम जनता को अपने घर, दुकान के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए अब 20 गुना अधिक शुल्क देना पड़ेगा। नया आदेश तत्काल लागू कर दिया गया है। इसका असर 534 गांवों की जमीन पर पड़ेगा।

सात जनवरी को प्रकाशित गजट के मुताबिक उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 में यथासंशोधित 1994 में बने बिल्डिंग बाइलॉज के नियमों में संशोधन किया गया है। इसमें आवासीय प्रयोजन के लिए प्लॉटिंग की दरों को भी बढ़ाया गया है। निजी कॉलोनियों के ले-आउट स्वीकृत कराने के लिए बिल्डर को चार गुना शुल्क देना होगा। इसमें भूखंड लेने वाले को अलग से निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराना होगा।

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प्लॉटिंग में सड़कों की न्यूनतम चौड़ाई नौ मीटर लागू कर दी गई है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम 300 वर्गमीटर से बड़े और 15 मीटर से ऊंचे भवनों के लिए लागू रहेगा। अग्निशमन के सुरक्षा नियमों में 400 वर्गमीटर से बड़े और 15 मीटर से ऊंचे भवनों को शामिल कर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। नक्शा पास कराते समय निर्माण करवाने वाले को पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था दिखानी होगी।

इस तरह से बदलीं गई मानचित्र दरें

भू-उपयोग पुरानी दरें नई दरें

आवासीय 05 100

व्यावसायिक 10 200

शैक्षणिक संस्थान 05 100

आवासीय कॉलोनियां 10 40

(दरें रुपये प्रति वर्गमीटर कारपेट एरिया पर लागू होंगी। इसके अलावा बाउंड्रीवाल के लिए अलग से 20 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क देना होगा। जिला पंचायत ने बाउंड्रीवाल को पहली बार निर्माण में शामिल किया है। प्लॉटिंग की दरें पूरे ले-आउट पर लागू होंगी। पुराना भवन तोड़कर निर्माण करने पर नया मानचित्र मौजूदा दरों पर ही स्वीकृत कराना होगा।)

समय विस्तार नहीं लिया तो 50 फीसदी जुर्माना

जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी प्रणव पांडेय ने बताया कि बिल्डिंग बाइलॉज में व्यवस्था की गई है कि अगर मानचित्र स्वीकृत होने के दो साल में निर्माण नहीं करा पाते हैं तो नई दरों पर 20 फीसदी शुल्क जमा कर दो वर्ष का समय विस्तार ले सकते हैं। इसके लिए आवेदन दो साल का समय पूरा होने से पहले करना होगा। ऐसा न करने पर जिला पंचायत शुल्क का 50 फीसदी जुर्माना लगा सकता है। इसे जमा करने के बाद ही अगले दो साल की अनुमति मिलेगी। निर्माण पूरा कराने के बाद पूर्णता प्रमाण पत्र भी 40 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुल्क जमा कर लेना होगा। मानचित्र से अलग निर्माण होने पर शमन भी समझौता शुल्क जमा कर कराया जा सकेगा। पांडेय ने बताया कि बिल्डिंग बाइलॉज में अब अवैध निर्माण तोड़ने की शक्तियां शामिल हो गई हैं। अभी तक केवल 1000 रुपये का चालान करने का नियम था। इसके बाद 50 रुपये प्रतिदिन की दर से यह जुर्माना बढ़ता था। नए नियम में पुलिस का सहयोग लेकर सीआरपीसी की धारा 133 में अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई हो सकेगी।

जिला पंचायत की बढ़ेगी आय

वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला पंचायत को मानचित्र स्वीकृत करने से केवल 14 लाख रुपये की आय हुई। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में नई दरों के लागू होने से आय बढ़ेगी। अगले वित्तीय वर्ष भी आय बढ़कर 20 गुना यानी करीब 2.50 करोड़ रुपये तक होने की उम्मीद है। भविष्य में औद्योगिक इकाइयों के अलावा निजी औद्योगिक पार्कों के भी जिला पंचायत क्षेत्र में आना प्रस्तावित हैं। इससे भी जिला पंचायत की आय बढ़ेगी। इस बजट का उपयोग जिला पंचायत क्षेत्र में विकास कार्य कराने में हो सकेगा।



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