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कासगंज के सोरों जी में महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करने के लिए तीर्थनगरी के लहरा गंगाघाट पर श्रद्धा और भक्ति का सैलाब देखने को मिला। कांवड़ मेला तो पिछले 8 दिनों से चल रहा है, लेकिन बृहस्पतिवार की रात से कांवड़ियों का काफिला बढ़ने लगा है। शुक्रवार को तकरीबन ढाई लाख भक्त कांवड़ भरकर ले गए। लहरा गंगा घाट से मथुरा-एटा मार्ग तक 30 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में कांवड़ियों की अनवरत कतारें चलती नजर आईं। हर हर गंगे और भोलेनाथ की जयकार से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा।
लहरा गंगा घाट पर जहां कांवड़ भरने के लिए जितने श्रद्धालु पहुंच रहे थे, उससे अधिक श्रद्धालु कांवड़ भरकर लहरा गंगाघाट से गंतव्य की ओर जा रहे थे। लहरा पर गंगा की सभी धाराओं पर श्रद्धालुओं की भीड़ थी। लहरा पर गंगा की तीन धाराएं बनीं हुईं थीं। हर जगह श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा अर्चना करते हुए कांवड़ भर रहे थे।
गंगा की पूरी तलहटी में जहां भी नजर जा रही थी वहां श्रद्धालु नजर आ रहे थे। भीड़ इतनी अधिक थी कि पुलिस भी वॉच टॉवर से निगरानी कर रही थी। कांवड़ियों की एक एक टोली में कम से कम 5 तो 15-20 तक श्रद्धालु साथ चल रहे थे। कांवड़ियों के कई जत्थों के आगे ट्रैक्टर – ट्रॉली और लोडर वाहन पर डीजे पर शिवभक्ति के गाने और भजन चल रहे थे। जिन पर श्रद्धालु आनंदित होकर भोलेनाथ की जय जयकार करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
भोले की जय जयकार से कांवड़ ले जाने का कठिन पथ भी सुगम नजर आ रहा था। तीर्थनगरी में शिवभक्त कांवड़ियों की धूम मची हुई थी। कांवड़ बाजार में भी कांवड़ियों की काफी भीड़ थी। चारों और श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा बना हुआ था। सोरोंजी-कासगंज मार्ग और कासगंज-एटा-मथुरा मार्ग पर देर रात्रि तक कांवड़ियों की कतारें बनी हुईं थीं।
लहरा गंगाघाट पर श्रद्धा और भक्ति के बीच देशभक्ति का रंग नजर आ रहा था। तमाम कांवड़िए अपनी कांवड़ पर तिरंगा लगाकर चल रहे थे। तिरंगा लगीं कांवड़ें भी आकर्षण का केंद्र बन रहीं थीं। तमाम टोलियां केसरिया परिधानों में नजर आ रहीं थीं। इन केसरियां टी शर्टों पर भगवान भोलेनाथ के चित्र छपे हुए थे। कई कांवड़ियों ने कांवड़ को झांकी का रूप दिया और उसे 4-4 कांवड़िए एक साथ उठा रहे थे। वहीं 51 गंगाजली से लेकर 1100 गंगाजली की कांवड़ें उठाई गईं।
बाजार में रही कांवड़ियों की भीड़
शिवभक्त कांवड़िए अपनी अपनी कांवड़ को आकर्षक बनाने के लिए तरह तरह से साज सज्जा करते रहे। कांवड़ की साज सज्जा का सामान खरीदने के लिए कांवड़ बाजार में लगी दुकानों में भीड़ आलम देखा गया। लहरा गंगाघाट पर गंगाजल भरने से पहले कांवड़ को दुल्हन की तरह सजाकर आकर्षक बना दिया।
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