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विभाग के भवन का आलम यह है कि ये कब गिर जाए, किसी को पता नहीं। ऐसे में यहां के कर्मचारी अपनी सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट पहनकर कार्यालय में काम करने को मजबूर हैं।
हम बात कर रहे हैं बागपत के विद्युत परीक्षण शालाओं की। विभागीय रिकाॅर्ड के अनुसार बागपत में चार विद्युत परीक्षण शालाएं हैं। जिनमें दो विद्युत परीक्षण शाला बड़ौत में, एक खेकड़ा और एक बागपत में है। जिनमें सहायक अभियंता, अवर अभियंता, नोडल अधिकारी, संविदा कर्मचारी के अलावा बाबू सहित लगभग 45 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यदि इनके भवन की बात करें तो अब काफी जर्जर हो चुका है। जिनके जगह-जगह से आए दिन प्लास्टर टूट कर गिरते रहते हैं। इससे कर्मचारी वेदपाल, ललित सहित अन्य कई बार कई कर्मचारियों को चोट भी आई है।
कर्मचारियों के अनुसार बरसात के समय तो भवन जगह-जगह से रिसता रहता है और भवन में जलभराव के बीच कर्मचारियों को मजबूरन सरकारी काम करना पड़ता है। इसके बावजूद कोई अधिकारी इसकी सुध नहीं ले रहा है। हादसे की आंशका जताते हुए खेकड़ा की विद्युत परीक्षण शाला से अवर अभियंता आकाश अपना स्थानांतरण कराकर काठा गांव में पहुंचे गए हैं।
इसके अलावा टीजी-2 अनिल भी अपना स्थानांतरण कराकर बागपत से दूसरी जगह पहुंच गए हैं। इसके अलावा टीजी-2 प्रमोद मलिक भी परीक्षण शाला की दयनीय हालत को देख यहां से अपना स्थानांतरण कराकर बड़ौत विद्युत परीक्षण शाला प्रथम में पहुंच गए हैं, जबकि प्रथम विद्युत परीक्षण शाला की हालत भी ज्यादा सही नहीं है। इसके अलावा कई संविदा कर्मचारी व आपरेटर भी नौकरी को अलविदा कह चुके हैं।
कई बार छत का प्लास्टर टूटकर गिरा शिकायत पर भी नहीं हुई सुनवाई
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित सहायक अभियंता विद्युत परीक्षण शाला पर तैनात सहायक अभियंता प्रभात भास्कर व अवर अभियंता महेशराज का कहना है कि कई बार छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है।
शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों में ललित, वेदपाल, सीमा, सचिन, भोपाल, विकास, अनुज कुमार, अमित कुमार, संजय ने बताया कि सरकारी काम करना है, तो मजबूर होकर हेलमेट पहनकर काम करना पड़ता है। उन्होंने महिला शौचालय न होने पर भी नाराजगी जताई।
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