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दिल्ली हाईकोर्ट
– फोटो : एएनआई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय से सुकेश चंद्रशेखर की एक याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। याचिका में 2017 के निर्वाचन आयोग रिश्वत मामले में धन शोधन रोधी कानून (पीएमएलए) के तहत उसके खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार ने याचिकाकर्ता के वकील और एजेंसी की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर और गौर करने की जरूरत है। दोनों पक्षों को लिखित प्रत्यावेदन दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया। मामले की आगे की सुनवाई पांच अप्रैल को की जाएगी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले में अपराध के संबंध में कार्यवाही पर रोक के मद्देनजर निचली अदालत धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप तय नहीं कर सकती। ईडी के वकील ने कहा कि याचिका इस मामले को लंबित करने का एक तरीका है। धन शोधन का यह मामला दिल्ली पुलिस की 2017 के उस मामले की जांच के दौरान सामने आया। इसमे आरोप लगाया गया था कि सुकेश चंद्रशेखर ने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरण से निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए पैसे लिए।
तमिलनाडु की आरके नगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में वीके शशिकला गुट के लिए अन्नाद्रमुक का ‘दो पत्तियों’ का चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए ऐसा किया गया। उच्च न्यायालय ने 2019 में दिनाकरण और सुकेश के खिलाफ रिश्वत के मामले में सुनवाई पर रोक लगा दी थी। निचली अदालत ने चंद्रशेखर के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में पीएमएलए के तहत आरोप तय किए थे।
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