Delhi: गंदी जलापूर्ति के लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार, एलजी सक्सेना ने किया जल शोधन संयंत्रों का दौरा

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एलजी वीके सक्सेना

एलजी वीके सक्सेना
– फोटो : ANI

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गरमी बढ़ने के साथ दिल्ली में गहराते जल संकट की बड़ी वजह जल शोधन संयंत्रों का सही तरीके से रखरखाव न हो पाना है। वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्र में जमा गाद जलापूर्ति को प्रभावित कर रही है। दोनों संयंत्रों का मुआयना करने पहुंचे उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसे अक्षम्य लापरवाही बताया है। 

इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार को तत्काल प्रभाव से दखल देने और मुख्य सचिव को सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। निरीक्षण के बाद तैयार नोट में जल बोर्ड और दिल्ली सरकार को पानी की किल्लत और गंदे पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। 

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री को भेजे गए नोट में उपराज्यपाल ने कहा है कि एनजीटी के आदेशानुसार यमुना सफाई के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते जल संयंत्रों का निरीक्षण करने का मौका मिला। यहां नियमों की घोर अवहेलना देखने को मिली। यह एक आपराधिक मामला बनता है। सभी संयंत्रों में जंग लगी है और जलाशय कचरे से भरा है। उपकरण ही नहीं, पाइपलाइन तक गाद से ढक गई है। 

उपराज्यपाल ने हैरानी जताई है कि अक्तूबर 2013 में आठ महीने के भीतर 7.79 लाख घन मीटर गाद हटाने का अनुबंध था, लेकिन 30 जून 2018 के बाद से किसी भी प्रकार की गाद निकालने का काम नहीं हुआ है। इससे संयंत्र के तालाबों में गाद जाम होती रही और उनका आकार छोटा होता गया। ‘अच्छी’ गाद ठेकेदार ने बेच दी और शेष को साइट पर छोड़ दिया। 

इससे तालाब फिर से भरते रहे। इसका नतीजा यह रहा है कि पानी को जमा करने उनकी क्षमता कम हो गई। 10 लाख घन मीटर की गाद फिर से तालाब क्षेत्र को अवरुद्ध कर रही है। इस वजह से शहर की दैनिक जरूरतों का लगभग एक तिहाई पानी का शोधन नहीं हो पा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड के कुप्रबंधन के कारण पानी की बर्बादी की जा रही है।

सरकार से किया सवाल

  • किस तरह का पानी दिल्ली वालों को दिया जा रहा है?
  • पानी की गुणवत्ता क्या है, क्या यह वास्तव में पीने योग्य है?
  • क्या लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा रहा है?
  • क्या यह देश की राष्ट्रीय राजधानी में उचित है?
  • क्या दिल्ली 9,12,500 मिलियन गैलन पानी केवल इसलिए खो सकती है क्योंकि जल बोर्ड ने अपने भंडारण तालाबों की सफाई नहीं की?

जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो

तालाब क्षेत्र की गाद निकालने और सफाई करने की उपराज्यपाल ने नसीहत दी है। कहा है कि तत्काल प्रभाव से जल संयंत्रों की सफाई की जाए। कर्तव्य और आपराधिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इस तरह का कदाचार को अनदेखी नहीं की जा सकती। पर्यवेक्षण और निगरानी के उद्देश्य से अधिकारियों द्वारा नियमित आधार पर दौरे किए जाएं ताकि कमियों की पहचान की जा सके और समवर्ती रूप से उन्हें ठीक किया जा सके।

इस तरह की लापरवाही अक्षम्य

नोट में एलजी ने लिखा है कि बुनियादी सुविधा के प्रति इस तरह की लापरवाही अक्षम्य है। वजीराबाद बैराज में पानी के निम्न स्तर के कारण दिल्ली के कई इलाके जिसमें एनडीएमसी क्षेत्र, गुलाबी बाग, चाणक्यपुरी, विजय नगर और गुप्ता कॉलोनी समेत दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में आपूर्ति प्रभावित हुई थी। जल बोर्ड ने इसके लिए यमुना में पानी के निम्न स्तर को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि सच्चाई यह है कि डी सिल्टिंग जैसी बुनियादी चीज पर पिछले आठ वर्षों के दौरान जल बोर्ड ने काम नहीं किया। 

शराब की बोतल, सिगरेट समेत गंदगी का जमाव देखा

निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने देखा कि जहां संयंत्र से पानी उपचारित होता है, वहां की पाइप लाइन में जंग लगी थी। इसके चैंबर भी गंदगी और कचरे से भरे थे। इसमें खाली शराब की बोतलें, प्लास्टिक कचरा, सिगरेट मिली। साइट निरीक्षण की तस्वीर में यह साफ तौर पर दिखाई भी दे रहा है।

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