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वसंत ऋतु के आगमन को लेकर उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक पर्व फूलदेई मनाया जाने लगा है। यह उत्तराखंड का लोकपर्व है। इसमें छोटे बच्चे सुबह-सवेरे फूल लेकर लोगों की देहरियों पर रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। चैत्र मास की प्रथम तिथि को फूलदेई पर्व मनाया जाता है। फूलदेई त्योहार को फुलारी, फूल सक्रांति भी कहते हैं। यह पर्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है। इन दिनों पहाड़ों में जंगली फूलों की बहार रहती है।
फूलदेई पर भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में भी लोक संस्कृति जीवंत हुई। फूलदेई के अवसर पर क्षेत्र के बच्चों ने पारंपरिक मांगल गीतों के साथ रंग-बिरंगे फूल बरसाए। विधान सभा अध्यक्ष के साथ कैबिनेट मंत्रियों एवं विधायकों ने बच्चों से भेंट कर अपनी परंपरा से जुड़ने के लिए उत्साहवर्धन किया।
विधान सभा अध्यक्ष के साथ सभी ने इस पावन पर्व की बधाई देते हुए कहा कि हमारे पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और उसके संरक्षण का संदेश देते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी लोक परंपराओं एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोये रखने की भी जरूरत बतायी।
लोक पर्व फूलदेई के अवसर पर भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में बड़ी संख्या में क्षेत्र के बच्चों ने पारम्परिक मांगल गीतों के साथ रंग-बिरंगे प्राकृतिक पुष्पों की वर्षा की।
बच्चों के साथ विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डाॅ. धनसिंह रावत, सौरभ बहुगुणा, डाॅ. प्रेम चन्द अग्रवाल, विधायक अनिल नौटियाल आदि ने बच्चों से भेंट की.
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