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सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : PIXABAY
देश के किसी भी कोने में या विदेशों में रहकर भी अपने गांवों में विकास कार्य कराकर आप अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं। इससे खुद को तो सुकून मिलेगा ही, दुनिया से गुजर चुके बाप-दादा या अपनों का नाम भी जिंदा रहेगा। पिछले करीब डेढ़ साल में जिले की पांच पंचायतों में ऐसे पांच लोग आगे आए हैं। किसी ने अपनों की याद में स्कूल को कंप्यूटर दिया है तो किसी ने गांव की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। हालांकि ये सभी यहीं के रहने वाले हैं और पूर्व या वर्तमान प्रधान हैं।
ग्राम पंचायतों के विकास में प्रवासी व अप्रवासी लोगों की सहभागिता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर वर्ष 2021 के आखिरी में उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना शुरू की गई। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सहायकों को सौंपी गई।योजना के तहत पूर्वजों के नाम से ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन, विवाह के लिए बरात घर, स्किल सेंटर का निर्माण व संचालन, स्कूल व इंटर कॉलेज की कक्षाओं का निर्माण या स्मार्ट क्लासेज की स्थापना व संचालन, सीसीटीवी कैमरा, सर्विलांस सिस्टम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगवाया जा सकता है।
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इसी तरह चिकित्सा केंद्र का भवन, साजसज्जा, उन्नयन व उपकरण आदि। आंगनबाड़ी, मध्याह्न भोजन का रसोईघर व भंडारण गृह। पुस्तकालय, ऑडीटोरियम, उपकरण व ओपेन जिम। अंत्येष्टि स्थल का निर्माण समेत कुछ अन्य तरह के विकास कार्य भी कराए जा सकेंगे।
हालांकि योजना के प्रचार-प्रसार के अभाव में अभी तक 1,294 पंचायतों वाले जिले में अब तक पांच पंचायतों के पांच लोगों ने ही इस योजना के तहत गांव के विकास व सुरक्षा में सहयोग दिया है।
इनमें मिर्जापुर साहुखोर के प्रधान विनय सिंह ने 40 हजार रुपये देकर गांव में दो जगहों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया है तो जंगल दीर्घन सिंह के पूर्व प्रधान विवेक शाही ने कंप्यूटर दिया है। इसी तरह जंगल रानी सुहास कुंवरी के प्रधान पति चंद्रशेखर सिंह और नारायणपुर के प्रधान संजय चन्द व कोठा के प्रधान ने एक-एक सीसीटीवी कैमरा दिया है।
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