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इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थायी लोक अदालत आजमगढ़ के फैसले की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। लोक अदालत ने बीमित व्यक्ति की सीने में तेज दर्द के बाद मौत पर बीमा निगम को मृतक के भाई को 14 लाख रुपये का ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया था। जिसे बीमा निगम ने चुनौती दी थी। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने एलआईसी ऑफ इंडिया व अन्य की याचिका पर दिया है।
मामले में पक्षकार ठाकुर प्रसाद सिंह को बुखार व यूरिन इंफेक्शन हुआ। जिसका इलाज शिवपुर वाराणसी के अस्पताल में चल रहा था। 10 सितंबर 12 को मृतक के सीने में तेज दर्द हुआ और अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। भाई काली प्रसाद ने लोक अदालत में 14 लाख रुपये का दावा किया। अदालत ने निगम के खिलाफ आदेश दिया। बीमा कंपनी का कहना था कि मृतक ने जानकारी छिपाकर धोखा दिया है। वह एक साल पहले भी बुखार से पीड़ित हुआ था। अस्पताल में भर्ती था। बीमा कराते समय यह जानकारी नहीं दी। इसलिए वह बीमा भुगतान पाने का हक नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि खुद बीमा कंपनी के डाॅक्टरों की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सीने में तेज दर्द से मौत हुई है। एंटेरिक बुखार से मौत नहीं होती। मौत का बुखार से कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने कहा इसलिए एक साल पहले हुए बुखार की जानकारी न देना जरूरी तथ्य छिपाना नहीं है। मौत अन्य कारण से हुई है। इसलिए बीमा कंपनी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत के फैसले पर हस्तक्षेप का आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश से राशि फिक्स डिपॉजिट है। इसलिए ब्याज सहित दो माह में 14 लाख रुपये विपक्षी के पक्ष में अवमुक्त किया जाए।
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