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इस प्रसाद से दूर होगा विषाद
नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का शीघ्र आशीर्वाद पाने के लिए माता को नैवेद्य में केसर की खीर, हलवा या फिर चीनी का विशेष रूप से भोग लगाएं. इसके साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को प्रसाद स्वरूप चीनी भी प्रदान करें. ध्यान रहे कि ऐसा करते समय आपके मन में जरा भी अभिमान न आए, इसीलिए दान की बजाय प्रसाद के रूप में उस व्यक्ति की मदद करें. मान्यता है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के इस उपाय को करने पर साधक का जीवन सुखमय हो जाता है और उसे जीवन में कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती है.
इन शुभ मुहूर्त में करें पूजा
ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 am से 05:24 am
अभिजित मुहूर्त- 11:48 am से 12:36 pm
विजय मुहूर्त- 02:12 pm से 03:00 pm
गोधूलि मुहूर्त- 06:00 pm से 06:24 pm
अमृत काल- 11:51 pm से 01:27 am, 28 सितम्बर
निशिता मुहूर्त- 11:48 pm से 12:36 am, 28 सितम्बर
द्विपुष्कर योग- 06:16 am से 02:28 am, 28 सितम्बर
मां ब्रह्मचारिणी की साधना का महामंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
मां ब्रह्मचारिणी की प्रिय वस्तु
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित करें.
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
वहीं इस दिन की पूजा विधि की बात करें तो सर्वप्रथम देवी को पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद इन्हें पुष्प, अक्षत, कुमकुम और सिंदूर वगैराह अर्पित करें. देवी ब्रह्मचारिणी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाने चाहिए. इन्हें मिश्री या सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं. उसके बाद ही मां की आरती करें.
मां ब्रह्मचारिणी की कथा
मां ब्रह्मचारिणी ने अपने पूर्व जन्म में राजा हिमालय के घर में पुत्री रूप में लिया था. तब देवर्षि नारद के उपदेश से इन्होंने भगवान शंकर को अपने पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी. इस दुष्कर तपस्या के चलते इन्हें तपस्चारिणी यानी कि ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया (chaitra navratri 2nd day) गया. कथा के अनुसार एक हजार वर्ष उन्होंने केवल फल, मूल खाकर व्यतीत किए और सौ वर्षों तक केवल शाक पर निर्वाह किया था. कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखते हुए देवी ने खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के भयानक कष्ट भी सहे
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