Kullu Kahika Utsav: फिर दिखा दैवीय खेल का नजारा, मूर्छित होने के बाद जिंदा हो गया नड़

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Himachal Kullu News: Kullu Kahika Utsav devotees pay obeisance

काहिका उत्सव में पहुंचे देवता।
– फोटो : संवाद

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कुल्लू घाटी के काहिका उत्सव में सालों पुराने दैवीय खेल का नजारा आज भी देखने को मिलता है। आजकल घाटी में यह उत्सव पूरे जोश से मनाया जा रहा है। रविवार को जिंदगी और मौत के दैवीय खेल के बीच आधा घंटे के बाद मूर्छित पड़ा नड़ जिंदा खड़ा हो उठा। अचेत अवस्था में नड़ को माता भुवनेश्वरी के घराकड़ गांव के मुख्य हारियानों ने मंदिर परिसर में ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के बीच लाया। दाह संस्कार में इस्तेमाल होने वाले पंचरत्न की भी पूरी व्यवस्था थी, लेकिन जीत दैवीय शक्ति की हुई।

यह सब माता भुवनेश्वर देवी जगन्नाथी के मंदिर पुईद में आयोजित काहिका उत्सव में देखने को मिला। रविवार शाम करीब 5:30 बजे माता के मंदिर से करीब आधा किलोमीटर दूर चिह्नित स्थान पर नड़ को ले जाया गया। जहां पर माता के मुख्य देवलू ने बंदूक से हवाई फायर किया। फायर होते ही नड़ मूर्छित होकर जमीन पर जा गिरा। कफन ओढ़कर अचेत अवस्था में नड़ को हाथों पर उठाकर मंदिर परिसर में लाया गया। ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की मंगल ध्वनि के बीच देवता थान शिम और माता भुवनेश्वरी जगन्नाथी के गूर और कारकून नड़ की पत्नी के आग्रह पर उसे फिर से जीवित करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

कुछ देर तक यहां लोगों की सांसें थमी रहीं। यह सिलसिला करीब आधा घंटे तक चला और पूरा इलाका देव ध्वनि से गूंज उठा। माता के गूर ने नड़ दोतराम पर पवित्र जल मंत्रित कर छिड़का। पानी छिड़कते ही नड़ होशों हवास में आ गया और सैकड़ों उपस्थित लोगों के मस्तक माता के चरणों में झुक गए। इस बार का काहिका उत्सव छह साल के बाद आयोजित किया। काहिका उत्सव देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

दावा- दैवीय शक्ति से पहले आदमी को दी जाती है मौत

काहिका उत्सव को लेकर लोगों का दावा है कि यहां पर दैवीय शक्ति से पहले आदमी को मौत दी जाती है और फिर वह व्यक्ति दैवीय शक्ति से जिंदा उठ खड़ा होता है। काहिका उत्सव जिले में कई जगह तीन साल बाद मनाया जाता है। अधिकतर स्थानों पर देवी-देवता की आज्ञा के अनुसार ही उत्सव आयोजित किए जाते हैं।

काहिका उत्सव देवताओं के आदेश पर इस बार सुख-समृद्धि की कामना के लिए छह साल बाद आयोजित हुआ। स्थानीय निवासी मास्टर चने राम, लंबरदार अशोक ठाकुर, पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा तथा पूर्व पंच सुनू राम ने बताया कि उत्सव का आयोजन सदियों से किया जा रहा है। माता के कारदार चमन ठाकुर का कहना है कि इलाके की सुख-समृद्धि के लिए उत्सव आयोजित किया जाता है।

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