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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : amar ujala
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किताबों की छपाई में देरी सरकारी स्कूलों के बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। जम्मू संभाग के 12,322 सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए 33 दिन बीत चुके हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए पुराने सेशन की सीमित संख्या में उपलब्ध किताबों से काम चलाया जा रहा है और वह भी पूरी नहीं हो पा रहीं। ऐसे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि आने वाले दिनों में गर्मी की छुट्टियां हो जाएंगी।
जानकारों का कहना है कि स्कूलों में किताबें भेजने का काम मई के दूसरे हफ्ते में पूरा होना संभव नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि कई ऐसे स्कूल भी हैं जहां बिना किताब के बच्चे पढ़ रहे हैं। इसका एक उदाहरण राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गांधी नगर है, जहां किसी बच्चे को किताबें नहीं मिलीं।
हालांकि कुछ छात्र भाई-बहन की किताबें लेकर पढ़ रहे हैं, बाकी बिना किताबों के स्कूल आ रहे हैं, जिससे शिक्षक भी परेशान हैं। एक अभिभावक ने बताया कि बच्चे को सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात देखकर लगता है कि बच्चा पढ़ ही नहीं पाएगा। इतने पैसे भी नहीं है कि निजी स्कूल में दाखिला करवा सकें।
दरअसल, जम्मू शिक्षा विभाग की ओर से पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक बच्चों को किताबें उपलब्ध करवाई जाती हैं। नए सेशन से पहले स्कूलों में किताबें पहुंच जाती हैं, लेकिन इस बार बिना किताब के बच्चों के हाथ खाली हैं। सेशन एक अप्रैल से शुरू हो चुका है। अभी भी सरकारी स्कूलों के बच्चों के पास किताबें नहीं आई। बच्चे एक महीने से बिना किताबों के ही स्कूल जा रहे हैं। कुछ बच्चे पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं।
स्कूल प्रशासन भी नए स्टॉक से किताबें नहीं दे पाया, जो कुछ स्टॉक पड़ा है, उससे काम चलाया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि मई में हर बच्चे को किताबें मिल जाती है, लेकिन इस बार देरी हुई है। जम्मू संभाग में सरकारी स्कूलों में 7,33,587 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से सवा चार लाख बच्चे किताबों का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से पढ़ाई में अड़चन पैदा हो रही है। सूत्रों के अनुसार हर साल मई में ही किताबें आती हैं। अगर किताबों का वितरण मार्च में किया जाए तो अप्रैल से हर बच्चे को किताबें मिल जाएं।
700 बच्चे हैं। 530 से ज्यादा बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। किताबें अप्रैल के अंतिम सप्ताह में आ जाती थी। स्टाफ पता कर रहा है। कुछ बच्चों को पुराने स्टॉक में पड़ी किताबें दी हैं ताकि पढ़ाई जारी रहे। -दिनेश खजूरिया, संचालक, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गांधी नगर।
28 अप्रैल से हर जोन में किताबें चली गईं। 16 मई तक हर स्कूल में पहुंच जाएंगी। यह समस्या प्रिंटिंग के कारण हुई है। -अशोक कुमार शर्मा, डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन।
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