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मन में एक ही पछतावा है कि पापा ने जिसे अपने भाई की तरह माना और हत्या कर लूट जैसे संगीन अपराध में न सिर्फ जमानत दिलाने में मदद की, बल्कि बाहर आने पर उसे फैक्ट्री में नौकरी तक दिला दी। अब उसी ने खुशियां उजाड़ दी। बहनों को अब मुंहबोले चाचा के प्रति गुस्सा है तो गांव वाले भी हैरान हैं। गांव वाले भी बोल रहे हैं, सत्यनारायण सिंह रामसिंह को भाई की तरह मानते थे। दूर के रिश्तेदार थे और इतनी मदद के बाद ऐसा कर दिया तो अब कौन किसकी मदद करेगा?
हत्या और लूट में जेल गया था राम सिंह
राम सिंह गोरहडीह गांव का ही रहने वाला है। उसकी अभी शादी नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक, साल 2016 में उसने खोराबार इलाके में ट्रक मालिक की हत्या कर सरिया लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में वह जेल गया था। साल 2020 में जमानत पर जेल से बाहर आया। उसके जमानत पाने में सत्यनारायण ने मदद भी की और फिर जेल से बाहर आने के बाद जिस फैक्ट्री में सत्यनारायण काम करते हैं, वहीं उसे भी नौकरी दिलाई। इसके बाद दोनों साथ ही आते-जाते थे, लेकिन बुधवार को राम सिंह ने साजिश रचकर हत्या कर दी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने आयुष का अपहरण करने के बाद तय किया था कि रात के अंधेरे में उसे लेकर गांव से कहीं दूर जाएगा। इसके बाद फिरौती के चार लाख रुपये की मांग करेगा। लेकिन, इसके पहले ही बुधवार शाम पांच बजे ही पुलिस ने उसे अपहरण के आरोप में दबोच लिया। संदेह के आधार पर पकड़ने के बाद पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन वह टूट नहीं रहा था।
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उसका मुंह खुलवाने में पुलिस को करीब छह घंटे लग गए और फिर रात 11 बजे उसने बच्चे के बारे में पुलिस को जानकारी दी। तब तक बहुत देरी हो चुकी थी, मुंह में कपड़ा ठूंसे जाने की वजह से उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। आनन-फानन उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो दिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई।
गांव वालों के मुताबिक, दरअसल, रामसिंह कभी सुधरा ही नहीं था। वह अक्सर बच्चों के अपहरण की कोशिश करते हुए पकड़ा गया, लेकिन तब लोगों ने ध्यान नहीं दिया। बताया जा रहा है कि जून 2022 में रामसिंह ने एक बच्चे को साथ लेकर जा रहा था, लेकिन गांव वालों ने देख लिया, तब छोड़ दिया था। अभी करीब 20 दिन पहले भी वह एक बच्चे को गाड़ी पर बैठाकर ले जा रहा था। हरपुर में किसी परिचित ने देख लिया था, उसके बाद बच्चा घर वापस आया था। इस तरह से उसने कई बार कोशिश की, लेकिन इस बार सफल हो गया।
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सत्यनारायण सिंह की दो शादी हुई है। पहली पत्नी से तीन बेटियों अंबिका (15), अंकिता (12), सुकन्या (9) के बाद आयुष का जन्म हुआ था। इसके कुछ दिन बाद आयुष की मां की मौत हो गई थी। हालांकि, सत्यनारायण सिंह ने बच्चों की परवरिश के लिए फिर दूसरी शादी कर ली। जिससे फिर एक बच्ची अनामिका (5) का जन्म हुआ। कुछ दिनों बाद दूसरी पत्नी की भी मौत हो गई। तभी से सत्यनारायण गांव पर ही रहकर खुद ही बच्चों की देखभाल करते हैं।
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