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जो नाला बना है। उसमें सड़क से सटे मकानों का ही पानी जा पाता है। पीछे की तरफ से करीब ढाई सौ से अधिक मकान है। मोहल्ले का पानी नहीं निकल पाता है। जंगल किनारे नाला बन रहा है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि बरसात के पहले काम पूरा हो पाएगा।– श्रीराम, जंगल सिकरी
कौआबाग मोड़ से गोड़धाेइया तक बना नाला मोहल्ले के लोगों के लिए बेमतलब है। मैत्रीपुरम मोहल्ला सड़क से काफी नीचे है। यहां आधे मोहल्ले में जलभराव होता है। गोड़धोइया नाले की सफाई कराई गई है। अब बारिश में इसका अंदाजा लग सकेगा कि कितनी राहत मिली है।-रमेश कुमार पांडेय, जेल बाईपास
पादरी बाजार तक जो नाला बना है। उसका कोई फायदा नहीं है। मोहल्ले काफी नीचे हैं। पानी बरसने पर पंप लगाना पड़ता है। जंगल मातादीन, आर्यपुरम सहित कई निचले इलाकों में हर साल बरसात में जलभराव होता है।-एसएन चतुर्वेदी, मैत्रीपुरम
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सड़क बनाने के दौरान नाला मनमानी तरीके से नाला बनाया गया है। सामान्य दिनों में होने वाली बारिश से परेशानी होती है। इससे बचाव के जो इंतजाम किए गए हैं। उसका कितना लाभ मिलेगा। यह तो पानी बरसने पर मालूम होगा।-संतोष कुमार, पादरी बाजार
एक दो मोहल्ले ही नहीं, पूरा शहर जलभराव से परेेशान होता है। मानसपुरम कॉलोनी में पानी भरता है। मोहनापुर के लोग भी समस्या से जूझते हैं।-संदीप प्रजापति, सरस्वतीपुरम।
असुरन से लेकर मेडिकल कॉलेज तक बना नाला काफी ऊंचा है। इसका निर्माण होने के बाद से परेशानी बढ़ गई है। पिछले साल बरसात में तो काफी दुर्गति हुई। इस बार देखिए नगर निगम के नए मेयर और पार्षद कितना राहत दिला पाते हैं।-विशाल कुमार, राप्ती नगर।
विष्णुपुरम मोहल्ले में पिछली बार बरसात में लोगों के घर डूब गए थे। तब यहां आए नगर निगम के अधिकारियों ने कहा था कि आगे से ऐसी दिक्कत नहीं आएगी। कुछ निर्माण तो कराया गया है, लेकिन इसका लाभ मिलने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही।-प्रिंस कुमार, असुरन चुंगी।
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