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बिजली गुल
– फोटो : ani
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बिजली जैसी फुर्ती एक मुहावरा है। काश इसी तरह की कुछ फुर्ती बिजली विभाग में भी होती। बिजली पारेषण की गति लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है। धरती की निचली कक्षा में स्थित उपग्रह 90 मिनट में पूरी धरती का एक चक्कर लगा सकता है। आप साधारण हवाई जहाज में बैठकर नई दिल्ली से न्यूयार्क 14 घंटे 32 मिनट में पहुंच सकते हैं।
लेकिन स्मार्ट सिटी का बिजली विभाग बिजली गुल होने पर बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाने में 16 घंटे लगा देता है तो उसकी कार्य की गति पर सवाल तो उठेंगे ही। भीषण गर्मी में लोग बिलबिलाते रहें महकमे के अफसरों की बला से। मामूली आंधी बिजली महकमे की पूरी व्यवस्था को पल भर में उड़ा देती है। वह भी तब जब न एक पोल गिरा, न तार क्षतिग्रस्त हुए। अगर प्रबल आंधी आए तो बिजली व्यवस्था का क्या हाल होगा समझा जा सकता है।
स्वर्ण जयंती नगर के बाशिंदे प्रमोद श्रोत्रिय बताते हैं कि बिजली पहले भी जाती थी, लेकिन एक-दो घंटे में आ जाती थी। इस बार तो सभी रिकार्ड टूट गए। रात भर भीषण गर्मी में उबल कर स्वर्ण जयंती नगर में रहने वाले कई परिवार परेशान होकर अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए। देर शाम बिजली की आपूर्ति बहाल हो पाई।
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