Online Game Effect: मोबाइल गेम बच्चों के दिमाग पर हावी, नींद में कह रहे, ‘धांय-धांय’

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Online game addiction affecting brain of children in Gorakhpur

सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : iStock

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गोरखपुर शहर के 14 वर्ष को एक किशोर को एफपीएस कमांडो सिक्रेट मिशन गेम खेलने की लत ऐसी लगी कि वह अब नींद में ऐसे-ऐसे शब्द बोलता है कि माता-पिता घबराए हुए हैं। नींद में वह धांय-धांय.. या आई किल यू, मार डालो.. जैसे शब्द बोलता है। ऐसी आवाजें सुनते ही माता-पिता उसे नींद से जगा देते हैं। तब जाकर वह सामान्य होता है। लेकिन, यह समस्या एक दिन की नहीं है। सप्ताह में चार-पांच दिन इसी तरह नींद में बड़बड़ाना सामान्य हो गया है।

ऐसे 200 से अधिक बच्चों की काउंसिलिंग बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक कर रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि किसी भी चीज की लत दिमाग पर हावी हो जाए, तो उसे मनोचिकित्सक की भाषा में ड्रीम वर्क कहते हैं। यह ड्रीम वर्क दिमाग में इस कदर बैठ जाता है कि बच्चा हर वक्त उन्हीं बातों को सोचता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक प्रो. डॉ. अमिल हयात खान ने बताया कि गेम की लत बच्चों के दिमाग पर हावी होती जा रही है, जो उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है।

कोरोना काल में लैपटॉप-मोबाइल के इस्तेमाल ने बिगाड़े हालात

ऐसे मामले कोरोना महामारी के बाद तेजी से बढ़े हैं। महामारी के दौरान बच्चों के हाथों में लैपटॉप और मोबाइल पकड़ा दिया गया। उन पर नजर भी नहीं रखी गई। ऐसे में बच्चों को गेम की लत लग गई। इसमें ज्यादातर गेम हिंसक हैं। ये गेम उनके दिमाग पर अलग-अलग तरीके से असर कर रहे हैं। बच्चे नींद में बड़बड़ा रहे है। डॉ. अमिल हयात का कहना है यह समस्या जल्दी समाप्त नहीं होने वाली है। क्योंकि, बच्चों का दिमाग ज्यादा तेज चलता है। एक बार अगर दिमाग में कोई बात बैठ जाती है, तो वह हर वक्त गूंजती रहती है। इसी समस्या को ड्रीम वर्क कहते हैं।

 

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