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– फोटो : iStock
विस्तार
जिला पुंछ में जीरो लाइन पर बसे गांवों में भी मोबाइल की घंटियां बजने लगी हैं। भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर करमाड़ा सेक्टर के अंतिम गांव कमरमाड़ा, सयाल, पोलस में दो टॉवर लगने से फुल नेटवर्क आ रहा है। इन गांव में बुजुर्ग, युवा, युवतियां व स्कूली विद्यार्थी मोबाइल पर बातें करते, चैटिंग या यू ट्यूब पर सर्च करते नजर आने लगे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि अब तो जीरो लाइन पर खड़े होकर भी आसानी से मोबाइल पर बात कर पा रहे हैं। नेट का भी प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामीण मनिंदर सिंह, मोहम्मद रफी, जावेद इकबाल, सुलताम मोहम्मद और मोहम्मद रशीद का कहना है कि देश की आजादी के बाद पहली बार गांव में मोबाइल की घंटी बजी है।
उन्होंने कहा कि उम्मीद ही नहीं थी कि कभी हमारे गांव में भी मोबाइल का नेटवर्क आएगा। पर सरकार ने कर दिखाया है। अब तो गांव में ही दो मोबाइल टॉवर लग गए हैं। जीओ और एयरटेल का पूरा नेटवर्क घरों के अंदर भी आ रहा है।
आपातकाल में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन से संपर्क होगा आसान
लोगों ने कहा कि पहले पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से कोई घायल हो जाने या आपातकाल स्थिति में गांव से तीन किलोमीटर दूर पुंछ की तरफ जाकर मोबाइल से फोन कर एंबुलेंस या अन्य सहायता मंगवानी पड़ती थी। गांव में 3 साल पहले पाकिस्तानी गोलाबारी में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई तो चौकीदार को गोलाबारी के बीच पुंछ जाकर पुलिस और सेहत विभाग को जानकारी देनी पड़ी थी।
सबने कई सालों से मोबाइल फोन खरीद कर रखे थे, जिन पर गांव से बाहर जाने या पुंछ नगर में ही बात हो पाती थी। लोगों ने बताया कि कई बार काम से बाहर होते थे तो गांव में अचानक पाकिस्तानी गोलाबारी शुरू हो जाती थी। नेटवर्क न होने से घर वाले सूचना तक नहीं दे पाते थे। घर लौटते वक्त बीच रास्ते में फंस जाते थे। कई घंटों बाद गोलाबारी थमने पर घर पहुंचते थे। अब ऐसी स्थिति में आसानी से संपर्क कर पाएंगे।
छात्र बोले-पढ़ाई में होगी आसानी
गांव सयाल के 12वीं के छात्र रमीज, इरफान और साजिया ने कहा कि गांव में मोबाइल नेटवर्क आने से अब पढ़ाई में काफी आसानी हो गई है। खुद ही अधिकतर प्रश्नों को हल कर लेते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं में भी शामिल नहीं हो पाए थे। अब तो धड़ल्ले से नेट चल रहा है। जो कुछ पढ़ना हो एक मिनट में मोबाइल पर निकाल कर पढ़ लेते हैं।
केंद्र सरकार की नीति में बदलाव के बाद लोगों को मिली राहत
गौरतबल है कि पूर्व में केंद्र सरकार की नियंत्रण रेखा से 10 किलोमीटर की दूरी पर मोबाइल टॉवर लगाने की अनुमति थी। इसके चलते जिला मुख्यालय पुंछ नगर में भी मोबाइल टॉवर नहीं लग पाए थे। बाद में केंद्र सरकार की नीति में बदलाव के बाद कुछ वर्ष पहले जिला मुख्यालय में मोबाइल टॉवर लगाए गए थे।
अब नियंत्रण रेखा से मात्र एक या डेढ़ किलोमीटर दूरी पर भी भारतीय मोबाइल कंपनियों के टॉवर लग गए हैं। इससे करमाड़ा सेक्टर में नियंत्रण रेखा के अंतिम गांवों में भी मोबाइल की घंटी बज रही है। पर अभी भी जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित कई गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल की घंटी बजने का इंतजार है।
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