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माफिया अजीत शाही।
– फोटो : अमर उजाला।
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रेलवे कोआपरेटिव बैंक में धमकी और रौब गांठने के बाद माफिया अजीत शाही फिर सुर्खियों में है। लेकिन, बहुत कम लोगों को पता है कि अजीत शाही पर्दे के पीछे से अपराध को अंजाम देने में माहिर है। तकरीबन 33 साल पहले अजीत शाही ने जरायम की दुनिया में कदम रखा। लोन की गाड़ियों को खींचने के ठेके से उसने खुद को आर्थिक रूप से मजबूत किया।
अजीत शाही आम लोगों के बीच बहुत ही कम आता है, इसलिए उसे शहर में रहने के बावजूद जानने-पहचानने वाले बहुत कम लोग हैं। पहली बार वह खुद किसी घटना में सामने आया है। अब इसके पीछे उसकी मंशा क्या है, उसके दिमाग में क्या चल रहा है, फिलहाल यह हर किसी के समझ के बाहर है। उसे बहुत करीब से जानने वालों से लेकर पुलिस भी इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है।
अजीत के शातिरपना को पीडब्लूडी और एमके हत्याकांड से जोड़कर समझ सकते हैं। जब यह घटनाएं हुई तो उसका लोकेशन शहर से बाहर का था। लेकिन, पुलिस की जांच में हत्या के आरोपी का ताल्लुक अजीत से था। पर अपनी शातिर चाल के चलते वह पुलिस की आंख में धूल झोंकने में कामयाब हो गया। इसी तरह वर्ष 2004 में राप्तीनगर में इंजीनियर की हत्या के दो दिन पहले ही अजीत शाही एक पुराने मामले में जेल चला गया था। अजीत पर कार्रवाई करने वाले पुलिस अफसरों की माने तो पर्दे के पीछे रहकर ही अजीत घटनाओं को अंजाम देता है।
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