Success Story: गरीबी भरे हालातों के बीच 12वीं की परीक्षा में ऊना की बेटियों ने भरी सफलता की उड़ान

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HPBOSE 12th Result 2023: Una's daughters flew amid poverty

दीक्षा ठाकुर, कनुप्रिया, लवप्रीत व रजनीश कुमारी
– फोटो : संवाद

विस्तार

गरीबी भरे हालात के बीच बेटियों ने सफलता की उड़ान भरी है। अंब स्कूल से 12वीं की कक्षा से पढ़ाई कर चुकीं दीक्षा और लवप्रीत ने कठिन हालात के बीच पढ़ाई करते हुए मेरिट सूची में नाम बनाया है। बोर्ड परीक्षा में जमा दो कला संकाय में प्रदेश में आठवें स्थान पर रही अंब स्कूल की दीक्षा ठाकुर के पिता विपन कुमार अंब में एक पेंटर की दुकान पर काम करते हैं और माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। गरीबी के बीच दीक्षा ने समय निकाला और पढ़ाई की। इसी का नतीजा यह रहा कि 12वीं कक्षा का बोर्ड परिणाम आया तो मेरिट सूची में नाम देखकर दीक्षा का खुशी का ठिकाना न रहा। वहीं, कलां संकाय में प्रदेश में दसवां स्थान हासिल करने वाली लवप्रीत के पिता बीर सिंह पेशे से टैक्सी चालक हैं। लवप्रीत ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानीं और पढ़ाई पर फोकस किया। जब भी समय मिले तो पढ़ाई की और यही वजह रही कि उसका मेरिट सूची में शामिल हो गया। दोनों परिवारों की मानें तो बेटियों ने उनका नाम समाज में ऊंचा कर दिया है। आज बेटियों की उपलब्धि के चलते हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है। बेटियों पर उन्हें नाज है।

गरीबी भी नहीं तोड़ पाई अर्शदीप का हौसला

घर की हालत अगर खराब हो तो कई बार व्यक्ति मजबूरियों के जाल में फंसकर अपने सपनों का गला घोंट देता है, लेकिन इस बात को दरकिनार कर धुसाड़ा विद्यालय के छात्र अर्शदीप चौधरी ने बेहद मुश्किल हालात में जमा दो कक्षा के विज्ञान संकाय में मेरिट में स्थान हासिल किया। पिता का साया सिर पर न होने की वजह से आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए अर्शदीप ने जी तोड़ मेहनत करके मुकाम हासिल किया। बिना कोई टयूशन की मदद से अर्शदीप ने 98 प्रतिशत अंक लेकर प्रदेशभर में तीसरा स्थान हासिल किया है। पनोह निवासी अर्शदीप चौधरी के पिता का उस समय निधन हो गया जब वह महज चौथी कक्षा का छात्र था। पिता की मौत के बाद अर्शदीप की माता शामली देवी ने दिहाड़ी लगाकर अपने बेटे को कामयाब बनाने के लिए मेहनत शुरू कर दी। इसके अलावा स्कूल अध्यापकोंं का भी पूरा साथ अर्शदीप के साथ रहा। अर्शदीप चौधरी ने कहा कि घर की हालत ठीक न होने के चलते कई बार परेशानी तो आई लेकिन मां और अध्यापकों की मदद से सब परेशानी का समय समय पर हल भी निकलता रहा। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य और अध्यापकों की मदद से ही यह सब संभव हुआ है। वह खुद साधन जुटाकर मेडिकल क्षेत्र में जाकर चिकित्सक बनना चाहता है। बता दें कि अर्शदीप की माता शामली देवी गृहिणी है और आमदनी का कोई साधन नहीं है। वहीं, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धुसाड़ा के प्राधानाचार्य सुरेंद्र कौंडल ने बताया कि अर्शदीप ने मुश्किल हालातों में बेहतर करके दिखाया है। उनकी सफलता पर उन्हें खुशी है।

दिहाड़ी मजदूरी कर पढ़ाई बेटी

दिहाड़ी मजदूरी कर पढ़ाई बेटी रजनीश कुमारी ने पिता का नाम रोशन कर दिया है। रजनीश ने कला संकाय में प्रदेशभर में छठा स्थान हासिल किया है। बेटी की इस उपलब्धि से दिनभर पिता अनजान रहा क्योंकि उनके पास मोबाइल तक नहीं है। शाम घर पहुंचे पिता को जब बेटी की उपलब्धि का पता चला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मां के साथ घर के काम में हाथ बटाने के बाद देर रात तक पढ़ाई कर रजनीश ने सफलता हासिल की है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चलोला की छात्रा रजनीश कुमारी पुत्री अश्वनी कुमार ने विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारी और मेहनत की। रजनीश कुमारी ने बताया कि घर में आय का कोई साधन नहीं है पिता की दिहाड़ी लग गई तो घर में रोटी बन गई अन्यथा बहुत मुश्किल से गुजरना पड़ रहा है। छुट्टी वाले दिन या स्कूल से आने के बाद घर का काम करना पड़ता है। पांच से आठ घंटे रात को पढ़ाई करके मुकाम हासिल किया है। बताया कि वह अंग्रेजी विषय में स्नातक करना चाहती है। इसके बाद वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। उसने कहा कि असली सपने वहीं होते हैं जो नींद नहीं आने देते हैं। उन सपनों को ही लेकर मेरा आगे बढ़ने का इरादा है। मुझे उम्मीद है कि मैं अपने लक्ष्य में कामयाब होकर अपने माता-पिता का गांव का जिला का नाम रोशन करूंगी। वहीं, चलोला स्कूल के प्रधानाचार्य तिलक राज ने बताया कि रजनीश कुमारी ने 500 में से 481 अंक लेकर 96.2 प्रतिशत लेकर हिमाचल बोर्ड में छठा स्थान प्राप्त किया है। गरीब परिवार से संबंध रखने वाली रजनीश कुमारी ने बेहतर करके दिखाया है। वह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।

प्रिंटिंग प्रेस मजदूर की बेटी कनुप्रिया ने छुआ आसमान

 एक प्रिंटिंग प्रेस के कामगार का सिर उसकी बेटी ने फख्र से ऊंचा कर दिया है। उसकी तीन बेटियों में मंझली बेटी कनुप्रिया ने नॉन मेडिकल में प्रदेश में दूसरा स्थान ही हासिल नहीं किया है, बल्कि कंप्यूटर इंजीनियर बनने की तरफ कदम बढ़ाते हुए जेईई मेन की परीक्षा में भी कामयाबी हासिल की है। उपमंडल अंब के धंधड़ी निवासी संजय कुमार जालंधर में प्रिंटिंग प्रेस में कामगार है। जहां ओवर टाइम कर वह सिर्फ इतना कमा पाता है कि घर खर्च और तीन बेटियों की पढ़ाई को जारी रख सके। इसके अलावा उसके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। उसकी कमाई का लगभग आधा भाग तो जालंधर में मकान के किराए और कभी कभार घर आने-जाने में खर्च हो जाता है। इतनी कमाई नहीं है कि बच्चों को मंहगी ट्यूशन और कोचिंग दिला सके लेकिन बेटियों को ऐसी कोई कमी भी नहीं आने दी कि उनकी पढ़ाई लिखाई प्रभावित हो। उसकी बड़ी बेटी ने भी जमा दो कक्षा कामर्स में अच्छे अंक हासिल किए थे जबकि छोटी बेटी धंधड़ी में छठी कक्षा में पढ़ती है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई के बावजूद कनुप्रिया ने कामयाब होकर अपने माता के सपनों को पंख दे दिए हैं। संजय कुमार का कहना है कि बेटियों पर उन्हें नाज है। बेटी ने कामयाबी हासिल उनका नाम रोशन कर दिया है। यह उनके लिए एक सपने को साकार करे जैसा है।

 

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