HPBOSE 12th Result 2023: निजी स्कूलों की महंगी फीस और चकाचौंध के आगे चमके सरकारी ‘हीरे’

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HPBOSE 12th Result 2023:  Govt 'diamonds' shine in front of the expensive fees and glare of private schools

12वीं कक्षा तीनों संकाय के टॉपर।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के निजी स्कूलों की महंगी फीस, किताबों और चकाचौंध के आगे इस बार सरकारी स्कूलों के हीरों ने पूरी तरह से चमक बिखेरी है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित किए गए परीक्षा परिणाम में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस संकाय की संयुक्त मेरिट लिस्ट में शामिल 110 मेधावियों में 67 पर सरकारी स्कूलों के बच्चों ने कब्जा जमाया है। टॉप-10 सूची में आने के मामले में विज्ञान संकाय ने निजी स्कूलों की लाज बचाई है। टॉप-10 में 110 मेधावियों ने अपना स्थान बनाया। इनमें साइंस में 36, आर्ट्स में 50 और कॉमर्स में 24 विद्यार्थी शामिल हुए। इनमें आर्ट्स के 50 मेधावियों में 43 पर सरकारी, जबकि मात्र सात स्कूलों पर निजी स्कूलों के बच्चे टॉप-10 में अपना स्थान बना पाए हैं। इसके अलावा कॉमर्स के 24 मेधावियों में सरकारी स्कूलों से 13 और निजी स्कूलों से 11, जबकि साइंस संकाय की टॉप-10 सूची में शामिल 36 मेधावियों में से सरकारी स्कूलों के 11 और निजी स्कूलों के 25 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। वहीं ओवरआल मेरिट लिस्ट पर नजर दौड़ाएं तो इसमें टॉप-10 में कुल 49 मेधावी शामिल हुए हैं, जिनमें सरकारी स्कूलों से 23 और निजी स्कूलों से 26 विद्यार्थी शामिल हैं।

बोर्ड की ओर से जारी की गई ओवरआल मेरिट लिस्ट में भी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने पहले तीनों स्थान अपने नाम दर्ज किए हैं। इसके अलावा चौथे स्थान पर दो, छठे पर एक, सातवें पर चार, आठवें पर दो, नौवें पर आठ और 10वें स्थान के लिए तीन विद्यार्थियों ने निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ कब्जा जमाया है। वहीं साइंस में पहले स्थान पर एक, दूसरे पर एक, तीसरे पर दो, छठे पर एक, सातवें पर एक आठवें पर तीन और नौवें और दसवें स्थान पर एक-एक विद्यार्थी ने संयुक्त रूप से स्थान बनाया है। इसके अलावा आर्ट्स में पहले स्थान पर दो, दूसरे पर एक, तीसरे पर तीन, चौथे पर तीन, पांचवें पर चार, छठे पर चार, सातवें पर दो, आठवें पर 10, नौवें पर छह और 10वें स्थान पर संयुक्त रूप से सरकारी स्कूलों के आठ बच्चों ने स्थान बनाया है। काॅमर्स संकाय में पहले, तीसरे, चौथे और नौवें स्थान पर एक-एक, पांचवें, छठे और आठवें स्थान पर दो-दो, जबकि 10वां स्थान सरकारी स्कूलों के तीन बच्चों ने संयुक्त रूप साझा किया है।

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