Uttarakhand: 10 टोंगिया वन गांवों को राजस्व ग्राम बनाने की तैयारी, पीढ़ियों से हजारों परिवार करते हैं निवास

[ad_1]

राजस्व ग्राम के मानक पूरा करने वाले टोंगिया गांव

देहरादून जिला : सत्ती वाला, दलीपनगर, बालकुंवारी व चांडी

हरिद्वार : हरिपुर, पुरुषोत्तमनगर, कमलानगर

नैनीताल : लेटी, चोपड़ा व रामपुर

नोट- बग्गा-54 टोंगिया ग्राम मानकों को पूरा न करने के कारण उपयुक्त नहीं पाया गया

समितियों का होगा गठन

तीनों जिलाधिकारियों को ताकीद किया गया है कि वे वनाधिकार अधिनियम-2006, भारत सरकार की अधिसूचना 2008, संशोधित अधिसूचना 2012, व केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत ग्राम स्तरीय वनाधिकार, खंडस्तरीय समिति व जिलास्तरीय समिति का गठन करेंगे। प्रस्ताव तैयार कर दो माह के भीतर खंडस्तरीय समिति को प्रस्तुत करना होगा। समितियों का प्रभागीय वनाधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी आवश्यक निगरानी करेंगे। जिलाधिकारी पूरा पर्यवेक्षण करेंगे। एक माह में जिलास्तरीय समिति को प्रस्ताव देना होगा। जिलास्तरीय वनाधिकार समिति एक महीने के भीतर प्रस्ताव तैयार कर राजस्व परिषद को भेजेगी।

ये भी पढ़ें…Uttarakhand Weather:  भारी बारिश की चेतावनी, अधिकारी-कर्मचारियों को 27 तक फोन स्विच ऑफ नहीं करने के निर्देश

क्या हैं टोंगिया गांव

टोंगिया उन श्रमिकों के गांव हैं जो 1930 में वनों में पौधरोपण के लिए हिमालयी क्षेत्र में लाए गए थे। आजादी से पहले इन श्रमिकों को वनों में स्थित गांवों को कई तरह की सुविधाएं भी हासिल थीं। 1980 के आसपास वन संरक्षण अधिनियम बनने के बाद इनके अधिकार खत्म हो गए और ये गांव भी संरक्षित वनों में घिर कर रह गए।

वन विभाग की ओर से टोंगिया वन गांवों के संबंध में सभी जानकारियां व जरूरी सूचनाएं जिलाधिकारियों को दे दी गई हैं। राजस्व विभाग को प्रशासनिक विभाग बनाया गया है। अब उसके स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। – आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *