[ad_1]

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा के मोतला गांव के पास अवैध डंपिंग करने पर संज्ञान लिया है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को आदेश दिए हैं कि वह दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें। अदालत ने कहा कि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठेकेदार ने नाले में अवैध डंपिंग की है। अदालत ने अपने आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 31 जुलाई को तलब की है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह दो हफ्ते के भीतर अवैध डंपिंग को हटाएं और ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता के शपथपत्र का अवलोकन करने पर अदालत ने पाया कि नाले के पास ही ठेकेदार को डंपिंग के लिए पांच जगह चिन्हित की गई हैं।
अदालत ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पीने के पानी के टैंक से ऊपर की तरफ ही सभी डंपिंग जगह चिन्हित करना कोई समझदारी का काम नहीं है। बारिश के दौरान सारा मलबा नीचे की तरफ बहता है और पीने के पानी को दूषित करता है। अदालत ने जिला विधिक सेवा प्रााधिकरण और लोक निर्माण विभाग की ओर से दायर रिपोर्ट का अवलोकन पर पाया कि इस सभी अवैध डंपिंग के लिए ठेकेदार जिम्मेदार है। अदालत ने अपने आदेशों में कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण ठेकेदार ने अवैध डंपिंग की है।
रिपाेर्ट के माध्यम से अदालत को बताया गया कि स्कूल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मोतला गांव के आसपास भारी मात्रा में मलबा पाया गया। इस मलबे से घरों और गोशालाओं को भारी नुकसान पाया गया है। पानी के टैंक को भी नुकसान होने की आशंका है। कई घरों में अभी तक भी मलबा भरा हुआ है, जिन्हें अब छोड़ दिया गया है। अदालत को बताया कि जुलाई 2021 और अगस्त 2022 के महीने में भारी बारिश के कारण मोतला गांव में मलबा जमा हो गया था। याचिकाकर्ता संजीवन सिंह की याचिका में आरोप लगाया गया है कि ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही की वजह से पूरे गांव में मलबा भर गया है। इससे कई घरों और गोशालाओं को भारी क्षति हुई है।
[ad_2]
Source link