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Anil Deshmukh
– फोटो : Agency (File Photo)
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एनसीपी के मराठा सरदार शरद पवार के सामने 83 साल की उम्र में पार्टी के साथ अपना राजनीतिक वजूद बचाने की चुनौती है। जबकि भतीजे अजीत पवार के सामने शरद पवार की कुर्सी, पद और वैसी ही प्रतिष्ठा पाने का लक्ष्य। इसी इरादे से अजीत पवार महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब अपना दावा जता रहे हैं। अमर उजाला से विशेष बातचीत में शरद पवार के विश्वासपात्र और पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख कहते हैं, महाराष्ट्र में पिक्चर अभी बाकी है। 18 विधायक और पांच से अधिक विधान परिषद के सदस्य हमारे साथ हैं। बस थोड़ा सा इंतजार कीजिए।
जवाब में अजीत पवार के साथ मंत्री पद की शपथ ले चुके शरद पवार के पूर्व विश्वासपात्र छगन भुजबल कहते हैं कि हम ऐसे ही शपथ लेने नहीं चले आए थे। आने के पहले काफी होमवर्क किया है। अजीत पवार खेमे के विधायकों का कहना है कि इस बार 2019 नहीं दोहराया जाएगा। अब हम महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) की सरकार के साथ हैं। अजीत पवार के करीबी सूत्र का कहना है कि पार्टी और सिंबल दोनों अजीत पवार के पास हैं, क्योंकि शरद पवार तो पार्टी के अध्यक्ष ही नहीं हैं।
जब शरद पवार साहब क्षेत्र में निकलेंगे तो सब समझ में आएगा
यह भरोसा शरद पवार को भी है। उन्होंने जमीनी मराठा राजनीति की है। शरद पवार ने अजीत पवार की बगावत को शिवसेना के उद्धव ठाकरे के साथ हुई बगावत जैसा ही बताया है। उनकी बेटी सुप्रिया सूले को भी भरोसा है कि जनता और पार्टी संगठन बड़े पवार के साथ है। अनिल देशमुख दावा करते हैं कि थोड़ा इंतजार कर लीजिए। शरद पवार गुरुवार को दिल्ली में हैं। वहां से लौटने के बाद महाराष्ट्र में जिलावार दौरा करेंगे। जनता के बीच में जाएंगे। जब शरद पवार क्षेत्र में जाएंगे तो आपको फर्क साफ दिखाई देने लगेगा। अनिल देशमुख का कहना है कि तब अजीत पवार के साथ खड़े दिखाई देने वाले विधायकों और लोगों की संख्या स्वत: कम हो जाएगी। लोग उन्हें छोड़कर हटने लगेंगे।
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