Shimla News: समान नागरिक संहिता का समर्थन करने के बाद मंत्री विक्रमादित्य ने लिया यू-टर्न

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Minister Vikramaditya did a U-turn after supporting the Uniform Civil Code

मंत्री विक्रमादित्य सिंह।
– फोटो : अमर उजाला

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कॉमन सिविल कोड का बीते दिनों सोशल मीडिया पर खुलकर समर्थन करने के बाद अब लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यू-टर्न ले लिया है। गुरुवार को राज्य सचिवालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यूसीसी को लेकर कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जो फैसला करेगा, उसका मैं समर्थन करुंगा। पार्टी की तरफ से जो आदेश मिलेंगे, उन्हें माना जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही मुद्दों को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मामलों से ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार ने कॉमन सिविल कोड की बात छेड़ दी है। इस पर अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जो फैसला करेंगे, वो उन्हें मंजूर होगा।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि हिमाचल में महाराष्ट्र जैसे हालात कभी नहीं बनेंगे। कांग्रेस 40 सीटों के साथ चुनाव जीती है। यहां सरकार कोई गिरा नहीं सकता है। कांग्रेस एकजुट है। हिमाचल दूसरे के बनाए रास्तों पर नहीं चलता है। कांग्रेस को जीत का रास्ता भी हिमाचल ने ही दिखाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार मजबूती से चल रही है। लोक निर्माण विभाग में सभी समस्याएं दूर हो रही हैं। बरसात को देखते हुए हेल्पलाइन जारी की है। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई और सीआरएफ के बजट को केंद्र सरकार जल्द से जल्द मुहैया करवाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 4,000 करोड़ रुपये रोके हैं। उसे बहाल किया जाए। भाजपा के नेता हिमाचल में आकर अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व जयराम सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार का खामियाजा आज प्रदेश के युवाओं को भुगतना पड़ रहा है।

लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना में अपात्रों को दी जा रही थी सम्मान राशि

लोकतंत्र प्रहरी सम्मान योजना को लेकर मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस योजना के तहत ऐसे लोगों को सम्मान राशि दी जा रही थी जो हर साल करोड़ों रुपये की आईटीआर भर रहे हैं। वे स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे और ना ही आजादी के लिए इनका कोई योगदान था। आपातकाल के समय कानून व्यवस्था को नियंत्रण में करने के लिए इन लोगों को जेल में डाला गया था। भाजपा इन नेताओं की स्वतंत्रता सेनानियों के साथ तुलना करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास एक भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं है, जिसने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी हो बल्कि उन्होंने उस समय अंग्रेजों से माफी मांगने का काम किया है।

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