[ad_1]

मीटिंग ( प्रतीकात्मक)
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्व विभाग ने सुश्री प्रेमलाल के जेंडर की गुत्था सुलझा ली है। वह 70 के दशक की आईएएस अधिकारी थीं। देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह से उनके खून के रिश्ते थे। राजस्व अभिलेखागार से 60 बीघा जमीन के दस्तावेज गायब होने के मामले में अब उनका पीलीभीत कनेक्शन तलाशा जा रहा है।
यह मामला जमींदारी उन्मूलन एक्ट लागू होने से जुड़ा है। देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह के पास बेहिसाब जमीन थी। जमींदारी एक्ट लागू हुआ तो अतिरिक्त जमीनों पर सरकार ने कब्जा लेना शुरू कर दिया। ऐसे में चंद्र बहादुर ने वर्ष 1972 में अपनी अतिरिक्त जमीन में से 60 बीघा का एक टुकड़ा मौसेरी बहन आईएएस अफसर सुश्री प्रेमलाल को दान में दे दी। वह कर्नाटक में तैनात थीं।
यह जमीन कई साल तक उनके नाम रही। नौकरी पूरी करने के बाद प्रेमलाल दिल्ली में निजामुद्दीन ईस्ट स्थित अपने मकान में आ गईं। अब करीब 50 साल बाद अचानक पीलीभीत के मक्खन सिंह एक पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर प्रशासन के सामने उपस्थित हुए। दावा किया, प्रेमलाल ने वर्ष 1984 में 60 बीघा जमीन उनके पिता कश्मीर सिंह के नाम पावर ऑफ अटार्नी कर दी थी। बाद में कश्मीर सिंह ने अपने बेटे के नाम इसकी पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी। इसलिए जमीन पर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।
[ad_2]
Source link