Uttarakhand Exclusive: अब ग्रीन टेक्नोलॉजी से होगा 23 भूस्खलन जोन का उपचार, 100 करोड़ रुपये मंजूर

[ad_1]

Uttarakhand Exclusive News Now 23 landslide zones will be treated with green technology

भूस्खलन जोन
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के लिए नासूर बन चुके क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन के उपचार की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बॉयो-इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग करते हुए ऐसे भूस्खलन क्षेत्रों का ग्रीन टेक्नोलॉजी से उपचार किया जाएगा। पहले चरण में विभिन्न पर्वतीय जिलों में 23 क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन को चिह्नित किया गया है। वर्ल्ड बैंक वित्त पोषित यू-प्रीपेयर परियोजना के तहत इस काम के लिए प्रथम चरण में 100 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

प्रदेश में मानसून सीजन में हर साल सक्रिय होने वाले लैंडस्लाइड जोन प्रदेश के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा देते हैं। सड़कों के बंद होने से जहां आवाजाही बाधित होती है, वहीं पूरा जनजीवन प्रभावित होता है। सरकार भूस्खलन से बंद हुए मार्गों को खोलने में हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन हर बार फिर वही स्थिति बन जाती है। प्रदेश सरकार ने अब इनके स्थायी उपचार का निर्णय लिया है।

Pithoragarh: भारी बारिश से तबाही, उफनाई काली नदी में समाए दो आवासीय भवन, बड़ी संख्या में बकरियां मरीं

विश्व बैंक वित्त पोषित यू-प्रीपेयर परियोजना के प्रथम चरण मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु की अध्यक्षता में बनी उच्चाधिकार प्राप्त समिति की ओर से 23 सक्रिय भूस्खलन जोन के ट्रीटमेंट की अनुमति दी गई है। इनमें चमोली में एक, अल्मोड़ा में एक, नैनीताल में छह, पौड़ी में चार, टिहरी में चार, उत्तरकाशी में चार और रुद्रप्रयाग में तीन स्थानों पर क्रॉनिक लैंडस्लाइड जोन का उपचार किया जाएगा। इसके लिए बॉयो-इंजीनियरिंग तकनीक के तहत ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कंकरीट, सीमेंट और जाल के साथ विशेष प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाता है, ताकि मिट्टी-पत्थर और चट्टानें हमेशा के लिए स्थिर हो जाएं।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *