Shimla: चंडीगढ़, बीबीएमबी परियोजनाओं में हिस्सेदारी के लिए बनेगा रोडमैप, कैबिनेट उप समिति की बैठक में फैसला

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Roadmap will be made for share in Chandigarh, BBMB projects, decision in cabinet sub-committee meeting

कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष कृषि मंत्री चंद्र कुमार।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


चंडीगढ़ में हिस्सेदारी के दावों तथा बीबीएमबी परियोजनाओं में पानी की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर उठाया जाएगा। सोमवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। कमेटी के अध्यक्ष कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि हिमाचल मैत्रीपूर्ण ढंग से सभी समाधान चाहता है। 26 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में बीबीएमबी से 44 हजार करोड़ रुपये का बकाया एरियर लेने के मामले की सुनवाई होनी है।

प्रदेश के हितों को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गंभीरता से इस मामले की पैरवी की जाएगी। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत अंतर राज्यों के बीच हुए समझौतों का हवाला देकर मजबूत पक्ष रखने का भी बैठक में फैसला लिया गया। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने और बिजली एरियर के भुगतान बारे किए गए दावों को विस्तृत रूप में कमेटी के समक्ष रखा। पूर्व की सरकारों की ओर से इस मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी गई।

बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी सहित ऊर्जा सचिव, जल शक्ति सचिव, विधि सचिव बिजली बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद रहे। शानन परियोजना जिसकी लीज अवधि दो मार्च 2024 को समाप्त होने जा रही है, को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। फैसला लिया गया कि इस मामले को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 67(3) के

अनुसार भारत सरकार के समक्ष निरंतर तौर पर उठाने के लिए रोड मैप तैयार किया जाए।

पंजाब के मुख्यमंत्री पुनर्गठन एक्ट पढ़ने के बाद दें कोई बयान

कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंजाब पूर्ण पुनर्गठन एक्ट 1966 का अध्ययन करने के बाद ही कोई बयान देना चाहिए। उन्हें अपने अधिकारियों से इस बाबत जानकारी जुटानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल अपना हक मांग रहा है, जो एक्ट में निहित है।

बिजली परियोजनाओं के कैचमेंट एरिया में बढ़ा अवैध निर्माण

चंद्र कुमार ने कहा कि प्रदेश की बिजली परियोजनाओं के कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण बढ़ा है। कैचमेंट एरिया में पर्याप्त पौधरोपण भी नहीं हुआ। इस कारण ही मानसून सीजन के दौरान जारी भारी बारिश से प्रदेश में नुकसान अधिक हुआ है।

 

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