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– फोटो : अमर उजाला।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में फर्जी दस्तावेज के आधार पर बीटेक में 40 छात्रों के प्रवेश के मामले में जांच समिति ने रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। प्रवेश की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। इस मामले में पांच से ज्यादा शिक्षकों व कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 20 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई है, जिसमें इस प्रकरण को लेकर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में सितंबर-2022 में बीटेक की कक्षाओं में फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश लेने का मामला सामने आया था। शक के आधार पर कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी में अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामअचल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय व प्रो. पीके सिंह को रखा गया। जांच में कमेटी को 40 छात्र ऐसे मिले, जिन्होंने फर्जी ढंग से विश्वविद्यालय के बीटेक के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया था। इनमें 2020-21 बैच के 22 और 2021-22 बैच के 18 छात्र शामिल हैं।
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विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को साक्ष्य देने के लिए मौका दिया। इसके बाद प्रवेश निरस्त कर दिया गया। वहीं विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आई। पूरे प्रकरण से राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत करा दिया गया। मामले में शामिल नेटवर्क की जांच कराकर कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री व राजभवन से मिला।
इसके बाद कुलपति प्रो. राम अचल सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। कमेटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दे दी। 13 जुलाई 2023 को विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक में कार्रवाई को लेकर विधिक राय लेने का निर्णय लिया गया। अब विश्वविद्यालय को विधिक राय भी मिल गई है। 20 जुलाई को कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई गई।
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