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याचिका में, एसएसई-2019 विज्ञापन में विभिन्न श्रेणियों के लिए आरक्षण के प्रतिशत को दर्शाते हुए एक सारणीबद्ध प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया था – अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 34.32%, अनुसूचित जनजाति के लिए 17.86%, अनुसूचित जाति के लिए 13.83। याचिकाकर्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियां, अनुसुचित जातियां और अन्य। पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 4 में ओबीसी के लिए 27% या 14%, एसटी के लिए 20% और एससी के लिए 16% आरक्षण निर्धारित किया गया है। आयोग ने उल्लंघन के इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने विज्ञापन के आधार पर पदों की गणना की है जबकि संबंधित विभाग स्वीकृत संख्या के आधार पर रिक्तियों की गणना करते हैं।
29 सितंबर, 2022 के परिपत्र के एक प्रश्न पर, जिसमें पदों को दो भागों में विभाजित करने के लिए कहा गया था – मुख्य में 87% और ओबीसी के लिए 13% अनंतिम, आयोग ने प्रस्तुत किया कि इसे प्रधान पीठ, जबलपुर के समक्ष चुनौती दी गई थी, जिसने इसे व्यापक जनहित में बरकरार रखा था। आयोग ने अपने जवाब में जनहित याचिका खारिज करने की मांग की. आयोग ने 14 नवंबर, 2019 को SSE-2019 के तहत 571 पदों का विज्ञापन दिया।
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